हमारी सरकार में 100-500 में काम हो जाते थे, अब दरोगा 10 हजार लेता है:शिवपाल यादव

हमारी सरकार में 100-500 में काम हो जाते थे, अब दरोगा 10 हजार लेता है:शिवपाल यादव


(न्यूज़)।प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने 100 दिनों में भ्रष्टाचार को खत्म करने का दावा किया था। लेकिन हमारी (सपा) सरकार में जो काम 100-500 रुपए में हो जाता था, अब उसी काम के लिए दरोगा आज दस हजार से कम पर बात भी नहीं करते। यदि कोई झूठी एफआईआर हो गई तो उसे खत्म कराने के लिए पचास हजार लिए जा रहे हैं।शिवपाल यादव आरपीएस इंटर कॉलेज में एक सभा में कहा कि समाजवादी पार्टी में विलय का कोई सवाल ही नहीं है। हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरेगी। इस वजह से प्रदेश में दोबारा भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं आएगी।उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश के अलावा कई राज्यों में है। भाजपा शासन में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। महंगाई के साथ ही भ्रष्टाचार, हत्या और बेटियोंं पर अत्याचार लगातार बढ़ता जा रहा है। चार साल में गन्ने का एक भी रुपये दाम नहीं बढ़ा है। जबकि महंगाई लगातार बढ़ती गई।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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