प्रशासन ने फ़िर गिरवाया अवैघ निर्माण, बिंदकी बस स्टाफ इलाक़े का है प्रकरण

 प्रशासन ने फ़िर गिरवाया अवैघ निर्माण, बिंदकी बस स्टाफ इलाक़े का है प्रकरण


  फतेहपुर। शहर के बिंदकी बस स्टाफ इलाक़े में तालाब एवं नाले की ज़मीन पर हों रहे अवैघ निर्माण को आज देर शाम पुलिस प्रशासन के अधिकारियो की मौजूदगी में पालिका प्रशासन ने ढहा दिया। भू माफियाओं के इस खेल पर पूर्व में भी प्रशासनिक अधिकारियो ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को अंजाम दिया था, किन्तु अवैध कब्जेदारो को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देने का प्रतिफल यह हुआ कि शातिर कब्जेदारो ने फ़िर से निर्माण शुरू करवा दिया जिसपर आज एक बार फिर जिम्मेदारो की न सिर्फ़ किरकिरी हुई बल्कि कड़ा रुख भी अख़्तियार करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक़ इस प्रकरण में कुछ लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा भी कायम हो सकता है।

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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