अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बनाया नेकी की दीवार

 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बनाया नेकी की दीवार


---- जरूरतमंद लोग यहां से मुफ्त ले सकेंगे पुराने पहनने के लिए वस्त्र

बिंदकी फतेहपुर

बढ़ती कड़ाके की ठंड को देखते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा एक नेकी की दीवार बनाई गई जिसमें पुराने सूती और ऊनी कपड़े टांगे गए हैं जिसके चलते लोग यहां से मुफ्त में कपड़े ले जा सकेंगे और पहन सकेंगे

      नगर के तहसील रोड में तहसील के मुख्य द्वार के ठीक सामने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा रविवार को नेकी की एक दीवार का शुभारंभ किया गया इस नेकी की दीवार में विभिन्न लोगों द्वारा दिए पुराने कपड़े टांगे गए हैं ताकि ठंड से कांप रहे लोग यहां से मुफ्त कपड़े लिए जा सके और लोग पहनकर ठंड से अपने शरीर को बचा सके इतना ही नहीं लोगों से यह भी कहा गया कि जिन लोगों के पास करो मैं बेकार पुराने कपड़े हो तो यहां पर टांग जाए ताकि जरूरतमंद यहां से ले जा सके इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत मंत्री तरूण बाजपेई ने कहा कि यह लोगों के लिए भलाई का कार्य है इसी के चलते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा यह नेकी की दीवार बनाई गई है जिसमें तमाम लोग अपने घरों के पुराने कपड़े पहने हुए कपड़े यहां पर टांग देंगे और जरूरतमंद लोग यहां से मुफ्त में ले भी जा सकते हैं इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बलराम द्विवेदी शिवम गुप्ता हिमांशु त्रिपाठी अभिषेक मिश्रा प्रसाद सैनी ऋतिक कुमार हर्ष सिंह सुमित कुमार सपना वर्मा आरती तिवारी उदय राज ज्ञानेंद्र मिश्रा विशाल गुप्ता नमन सहित तमाम लोग मौजूद रहे

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र