सामुदायिक शौचालय बनकर रह गए शोपीस

 सामुदायिक शौचालय बनकर रह गए शोपीस



आज भी सुबह लोगो की लोटा पार्टी देखने को मिलती है


फतेहपुर।नगर पालिका के सामुदायिक शौचालय शोपीस बनकर रह गए हैं। शहर को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए तेरह लाख की लागत से 20 स्थानों पर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था।

इनमें अधिकांश शौचालयों में ताला बंद है। ऐसे में ओडीएफ शहर का तमगा सिर्फ नगर पालिका के अभिलेखों तक सिमट कर रह गया है।अमृत योजना के तहत शहर को ओडीएफ बनाने के लिए सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इन शौचालयों में विकास भवन, कलक्ट्रेट, तुराबअली के पुरवा, राधानगर चौराहे को अगर छोड़ दिया जाए। तो अन्य सभी सामुदायिक शौचालयों में ताले बंद हैं। इनमें रखी पानी की टंकिया भी लोग उखाड़ ले गए हैं। राहगीर और झोपड़ पट्टियों में रहने वाले लोगों को शौच जाने के लिए बनाए गए ये सामुदायिक शौचालय बेमकशद हो गए हैं।

नगर पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि हाजी रजा ने बताया कि निकाय में पहले से सफाई कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में शौचालय चलाने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इनमें कर्मचारी भर्ती करने के लिए शासन को लिखा गया है।

पीरनपुर निवासी सुशील कुमार का कहना है कि शौचालय में कर्मचारी की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में कुछ दिनों में ही शौचालय चोक हो गया है। लोगों ने यहां शौच जाना बंद कर दिया है, जिससे दरवाजा खिड़की भी लोगों ने तोड़ दिया है। ऐसे में लोगों का खुले में शौच जाना मजबूरी है।

पीरनपुर निवासी तन्नू कहते हैं कि एक दो को छोड़कर किसी भी सामुदायिक शौचालय में सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं है। यही कारण है नगर पालिका ने शौचालय बनाने के बाद ताला नहीं खोला है। खासी धनराशि खर्च होने के बाद लोगों का खुले में शौच जाना मजबूरी है।

तांबेश्वर मोहल्ला निवासी गुड्डू यादव कहते हैं कि नगर पालिका ने शौचालयों का निर्माण तो करा दिया है, लेकिन ऊपर रखी टंकी में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में सामुदायिक शौचालय पूरी तरह से बेमकसद साबित हो रहे हैं। मजबूर होकर लोग खुले में शौच जा रहे हैं।

रानी कालोनी निवासी रोहित कहते हैं कि सामुदायिक शौचालय निर्माण कराने में खर्च की धनराशि का लोगों को कोई लाभ नहीं मिला है। पहले की ही तरह लोग खुले में शौच जा रहे हैं। इसके पीछे का कारण सामुदायिक शौचालयों में व्याप्त अव्यवस्था है।