तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान

 तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान


फतेहपुर। ललौली आज जहाँ एक तरफ सियासत की बाज़ीगिरी में लोग अपने आपको ईश्वर से कम नही आंकते इंसानियत और जिंदादिली तो मानो नाम मात्र की रह गई है ज़मीनी हक़ीक़त व हिंदुस्तान की मिट्टी से मोहब्बत का आंकलन मात्र मज़हब से जोड़कर देखा जाता है। यही से शुरू होता हिन्दू व  मुस्लिम समाज मे असमंजस और आपसी भाई चारा।शबरी के बेर की जैसे खट्टे पड़ने लगते है और सियासत में लोग अपना उल्लू सीधा कर लेते है और यही नियम राजनीती का प्रथम सूत्र कहलाता है इसलिए आपसी भाई चारे को निभा कर इस वर्ष ईद उल अज़हा (बक़रीद) व श्रावण माह में आपसी प्रेम व समाज से हिन्दू मुस्लिम भेद भाव को खत्म करने का पुरजोर प्रयास करे, और हिंदुस्तान को एक नई दिशा की ओर अग्रसर करे।  

मुकेश कुमार निषाद