50 घरों का निषाद परिवार जंगल में झोपड़ी डालकर रहने को मजबूरब रास्ता व बुनियादी सुविधाओं को लेकर भूख हड़ताल,

 50 घरों का निषाद परिवार जंगल में झोपड़ी डालकर रहने को मजबूरब रास्ता व बुनियादी सुविधाओं को लेकर भूख हड़ताल,




संवाददाता बाँदा /दबंगों से परेशान होकर लगभग 50 घरों का निषाद परिवार जंगल में रहने के लिए मजबूर, रास्ता बुनियादी सुविधाओं से वंचित निषाद परिवार, कई बार शासन प्रशासन से लगा चुका गुहार, लेकिन आज तक सुनवाई ना होने से, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। 


आपको बता दें पूरा मामला बांदा जनपद के कमासिन विकासखंड अंतर्गत जोरावरपुर गांव के मजरा घोषण के ( केवटनपुरवा) का है। जहां पर लगभग 50 घरों का निषाद परिवार, अपने ही गांव के कुछ दबंगों के चलते, अपना घर छोड़ कर के जंगल में निवास कर रहा है। लेकिन आज भी वहां किसी भी तरह की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सबसे बड़ी समस्या इस परिवार की रास्ते को लेकर के हैं। जहां पर आज भी उनके घरों तक वाहन नहीं जा पाते हैं। जिससे किसी भी तरह की गंभीर स्थिति बीमारियों के समय कई किलोमीटर पैदल यात्रा करना पड़ता है। 

जिसको लेकर प्रशासन से कई बार इस परिवार ने गुहार लगाई है।

 कि उन्हें निकालने के लिए रास्ता प्रदान किया जाए, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति या बच्चों को पढ़ाई से संबंधित, आवागमन हो सके, पीड़ित परिवार का कहना है।

 कि हमारी 100 साल पुरानी रास्तायें व हमारी ग्राम- घौंसण की आबादी को लेकर हमें बहुत सताया गया है। खुलेआम अन्याय- ही अन्याय किया गया है।

 पीड़ित परिवार को घर से बेघर कर दिया गया जोकि जंगल में खुले आसमान के नीचे भूखे-प्यासे बहुत दुखों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं और  पीड़ित परिवार के मुताबिक परिवारजनों की तीन मौते भी हो चुकी हैं। जगह-जगह प्रार्थना पत्र देते गये जिससे गुण्डे व दबंग चिड़ते गये और हम थाना से लेकर लखनऊ मंत्री हीरा ठाकुर उप-पिछड़ा आयोग तथा भारत के केन्द्रीय मंत्री श्रीमती निरंजन ज्योति के पास गये व सांसद, विधायक के पास गये। हमसे कोई दरवाजा खड़खटाने से नहीं बचा आज से प्रार्थीगण अशोक लाट पर अनशन/भूख हड़ताल पर बैठे हुये हैं।

इस मामले को लेकर पहले भी जिलाधिकारी अनुराग पटेल से मीडिया के द्वारा बात की गई उन्होंने बताया कि हम इसकी जांच करवा रहे हैं।

अगर कोई भी सरकारी जमीन होगी तो वहां पर सरकारी जमीन से रास्ता दिलाया जाएगा या गांव के ही कुछ महत्वपूर्ण लोगों से बातचीत करके इस समस्या का समाधान कराया जाएगा।

 लेकिन अब देखने वाली बात यह है, इस निषाद परिवार को आखिर कब न्याय मिल पाता है आखिर इस निषाद परिवार को भूख हड़ताल के लिए क्यों बैठना पड़ा।