बकाया वसूली में सौतेले व्यवहार से जनता त्रस्त विद्युत विभाग के जिम्मेदार मस्त

 बकाया वसूली में सौतेले व्यवहार से जनता त्रस्त विद्युत विभाग के जिम्मेदार मस्त



विद्युत  बकायेदारी अभियान में कमाऊ पूत निभा रहे अहम भूमिका



औद्योगिक घराने और बड़े प्रतिष्ठान अभियान से दूर, गरीब, शोषित, वंचितों पर वसूली का चाबुक

वसूली की खानापूर्ति में जुटे चौडगरा के विद्युत् कर्मी 


चौडगरा- फतेहपुर, जनपद में शासन के निर्देश पर विद्युत विभाग द्वारा विद्युत बकायदारी जमा कराने को लेकर चलाया जा रहा अभियान परवान चढ़ने के पहले ही दम तोड़ता नजर आ रहा है! हालांकि विभाग द्वारा कनेक्शन काट कर बकायेदारों पर दबाव बनाया जा रहा है लेकिन लंबे समय से जमे कमाऊ पूतों के  चलते लाखों की बकायदारी वाले औद्योगिक घराने व बड़े प्रतिष्ठानो वाले व्यवसायियों से वसूली अभियान की दूरी क्षेत्र में चर्चा का विषय है।वसूली अभियान में लगे जिम्मेदारों और 

सिस्टम के गठजोड़ के चलते अभियान की सफलता के लिए प्रदेश सरकार उम्मीदें पानी में मिलती दिख रही हैँ.

 अभियान के अनुसार सबसे प्रथम क्रम में 10हज़ार से ऊपर के सभी विद्युत बकायेदारों की सप्लाई लाइन काटी जाती है और विद्युत् बकाया जमा करने का दबाव बनाया जाता है लेकिन बडे बकायेदारों में यह नियम तब बौना साबित हो जाता है जब बकायेदार से सुविधा शुल्क लेकर अभियान के जिम्मेदार पीछे के रास्ते से विद्युत सप्लाई लाइन पुनः जोड़ने में तनिक गुरेज नहीं करते. हालांकि बकायेदारी में शुमार आम आदमी बकाया जमा न कर पानें की स्थिति में अंधकार में रहनें को मजबूर रहता है.

जेई मुकेश कुमार नें बताया कि एक सप्ताह से चल रहे  "विद्दुत बकाया जमा अभियान" के तहत एक सैकडा बकायदारों पर कार्रवाई की गई है! सवाल यह है कि इस अभियान में लाखो के बकायेदार बड़े उद्यमी और रसूखदार बाहर हैँ जबकि महज़ हज़ारों का बकायेदार आम आदमी अभियान की चक्की में पीसा जा रहा है. कुल मिलाकर विद्युत् बकाया वसूली अभियान सरकारी राजस्व की वसूली से अधिक अभियान में लगे कमाऊ पूतों की व्यक्तिगत कमाई का जरिया बन चुका है. ऐसे में विभाग द्वारा अभियान के तहत दिए गए लक्ष्य को प्राप्त कर पाना फिलहाल दूर की कौड़ी ही लग रहा है.