इस नाशवान दुनिया में रोने और दुःख तकलीफों के सिवा और कुछ भी नहीं, इस भवकूप से निकलने का रास्ता खोजो

 इस नाशवान दुनिया में रोने और दुःख तकलीफों के सिवा और कुछ भी नहीं, इस भवकूप से निकलने का रास्ता खोजो



आपको सच्चा रास्ता बताऊंगा, जब वो करोगे तो आप अपने- वतन, घर, मालिक के पास पहुंच जाओगे जहां सुख ही सुख है, दुःख नाम की चीज नहीं 


इस शरीर के रहते-रहते नर्क-चौरासी दोजख से बचने का करो उपाय


उज्जैन (मध्य प्रदेश)।इस दुनिया मे काल और माया के जाल में फंसकर अपने मानव जीवन के अमूल्य समय को निरंतर खोते मानव को समझा कर जगाने-चेताने वाले, जीते जी मुक्ति-मोक्ष का मार्ग नामदान देने वाले इस समय के जीवित समर्थ सन्त सतगुरु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी ने 16 अप्रैल 2022 को प्रातः कालीन बेला में उज्जैन आश्रम से दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि कुल मिला करके इस दुनिया संसार में रोना ही रोना है, दुःख ही दुःख, तकलीफ ही तकलीफ है। आजकल तो तकलीफें बहुत है। घर-घर में बीमारी, लड़ाई-झगड़ा, ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्यता, परेशानी ही परेशानी है। 


*जब लोग यहां सेवा, सतसंग के लिए आते तो कहते हैं सुख-शांति महसूस हो रही है* 


यहां आते हैं कहते हैं ठीक लग रहा है, सब भूला हुआ है नहीं तो आदमी को वही दिखाई पड़ता है। गृहस्थी को सुलझाने में 24 घंटा लगा रहता है। गृहस्थी तो किसी की आज तक सुलझी नहीं। जितनी सुलझाने की कोशिश करो और उलझती चली जाती है। जैसे आग में घी डालो तो और तेज जल जाती है। तरीका होता है आग को बुझाने का। पानी से बुझाओ तो आग बुझ जाएगी। तो (गृहस्थी सेट करने का तरीका) कहां मिलेगा? वह तो जब सतसंग मिलता है तब मिलेगा। 


सतसंग जल जो कोई पावै।

मैलाई सब कटि-कटि जावै।। 


तब शीतलता मिलती है। सतसंग जल से कर्मों की मैल कटती है तब अनुभव होता है। जैसे ऊपर जंग लगे लोहे को पारस पत्थर से छुवाओ तो सोना नहीं बनेगा। कोई भी चीज बढ़िया से बढ़िया है, उसके ऊपर गंदगी लगी हुई है तो उसकी कीमत कुछ नहीं रह जाती है। सतसंग से जानकारी होती है, जब कर्म कटते हैं तब थोड़ी शांति मिलती है। 


*जैसे मकड़ी अपने ही बुने जाल में फंस कर दे देती है जान, ऐसे ही गृहस्थी में फंस रहा है इंसान* 


बताया गया है रहो गृहस्थ आश्रम में लेकिन फंसो नहीं। फस जाओगे तो निकल नहीं पाओगे। देखो भगवान ने भोग बनाया। किसके लिए? भोगने के लिए, फंसने के लिए तो नहीं बनाया। जब आप फंस जाओगे, गृहस्थी ही दिखाई पड़ेगी, वही बच्चे, वही पति, वही नौकरी, वही खेती तो उसी को देखोगे तो उसमें फंस जाओगे उसी का आनंद लेने के लिए। उसमें आनंद मिलेगा नहीं। मकड़ी की जाल की तरह से गृहस्थी है। जैसे वो सुख के लिए जाल बनाती है फिर उसमें से बाहर नहीं निकल पाती, उसी में उसकी जान चली जाती है। 


*सच्चे सन्त के सतसंग से सच्ची सीख मिलती है कि गृहस्थ आश्रम में कैसे रहना चाहिए* 


सतसंग क्या सिखाता है? गृहस्थ आश्रम में ऐसे रहो जैसे कटोरे में शहद रख दो। एक मक्खी आती है, कटोरे के ऊपर बैठकर शहद को खा कर उड़ करके चली जाती है। दूसरी मक्खी कटोरे में कूद पड़ती है, खूब शहद खाती है और उसी में पंख उसके फंस जाते हैं और मर जाती हैं। कहा जाता है कि रहो गृहस्थ आश्रम में। बहुत अच्छा आश्रम है। शरीर की सारी सुख-सुविधा हैं, औकात के हिसाब से सबके पास रहती है। शरीर के अंदर जो इच्छाएं जगती हैं लोगों को देखकर के, नेचरल प्राकृतिक जिसको कहते हैं, वह जो उत्पन्न होती है, वह सब चीजें गृहस्थ आश्रम में रहती हैं। 


*इस शरीर के रहते-रहते नर्क-चौरासी से बचने का करो उपाय* 


इस शरीर के रहते-रहते नर्क-चौरासी से बचने का उपाय करो। नहीं तो तमाम गृहस्थों को नरकों में चला जाना पड़ रहा है। गृहस्थी को बढ़ाने, चमकाने, सुख-सुविधा दिलाने के लिए, इंद्रियों के भोग के लिए आदमी गलत काम कर बैठता है, नर्कगामी हो जाता हैं, नर्कों में सजा मिलने लग जाती हैं। 


*नरकों में जाने का कोई काम मत करो* 


जो कुछ आप धर्म-कर्म जानते हो, वह कर्म को करते रहोगे तो भी आपके जीवात्मा का उद्धार नहीं होगा। बहुत अगर तपस्या शरीर से करोगे जो पहले लोग करते थे तो स्वर्ग-बैकुंठ में चले जाओगे लेकिन पुनः जन्म तो लेना ही पड़ेगा, मां के पेट में तो 9 महीना लटकना ही पड़ेगा। जो जन्मते और मरते वक्त तकलीफ़ होती है, उसको झेलना ही पड़ेगा। 


*जो रास्ता बताऊंगा, थोड़ी देर शरीर से मेहनत जब करोगे तो अपने वतन पहुंच जाओगे* 


आप जो लोग अब आप यहां पर (सतसंग में) आ गये हो आपको उपाय बताया जाएगा। फिर आपको सिवाय अपने घर, अपने वतन, अपने मालिक के पास पहुंचने के और कहीं जाना नहीं रहेगा। लेकिन जब बातों को पकड़ोगे, अमल करोगे, जो बताया जाएगा उसको करोगे थोड़ी देर, इस शरीर से मेहनत करोगे, मन को लगाओगे, जब मेहनत अंदर-बाहर करोगे तब यह संभव होगा। 


*सन्त उमाकान्त जी के वचन* 


84 लाख योनियों में केवल मनुष्य ही ऐसा है जो परोपकार कर सकता है।

समझ लो! कोरोना का तांडव, शिव तांडव के आगे कुछ भी नहीं है।

सोचो! जब शिव तांडव होगा तब कितने धरती पर से जाएंगे और कितने बचेंगे।

मानव मंदिर को गंदा रखकर पूजा करोगे तो कुबूल नहीं होगी।

सन्त दर्शन करने व सतसंग सुनने से समस्याओं का समाधान होता है। 


सन्त उमाकान्त जी का सतसंग प्रतिदिन प्रातः 8:40 से 9:15 तक (कुछ समय के लिए) साधना भक्ति टीवी चैनल और अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित होता है जरूर सुने।

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