शारदीय नवरात्र का चौथा दिन, इस दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा देवी की पूजा

 शारदीय नवरात्र का चौथा दिन, इस दिन ऐसे करें मां कुष्मांडा देवी की पूजा



ब्यूरो रिपोर्ट- न्यूज ऑफ फतेहपुर

                  अजय प्रताप


शारदीय नवरात्र आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि के साथ आरंभ हुए थे। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाती है। इसी क्रम में चौथे दिन आदिशक्ति के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां कुष्मांडा देवी ने सृष्टि की रचना की थी। कुष्मांडा एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है कुम्हड़ा यानी पेठा की बलि देना। माना जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जानिए मां कुष्मांडा की पूजा का शुभ मुहूर्त, स्वरूप और मंत्र।


मां कुष्मांडा की पूजा का शुभ मुहूर्त


अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक कैसा है मां कुष्मांडा का स्वरूप?

मां कुष्मांडा नौ देवियों में से चौथा अवतार माना जाता है। मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं होती है। इसी कारण उन्हें अष्ठभुजा के नाम से जाना जाता है। बता दें कि मां के एक हाथ में जपमाला होता है। इसके साथ ही अन्य सात हाथों में धनुष, बाण, कमंडल, कमल, अमृत पूर्ण कलश, चक्र और गदा शामिल है।

ऐसे करें मां कुष्मांडा की पूजा

इस दिन सुबह उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद विधिवत तरीके से मां दुर्गा और नौ स्वरूपों के साथ कलश की पूजा करें। मां दुर्गा को सिंदूर, पुष्प, माला, अक्षत आदि चढ़ाएं। इसके बाद मालपुआ का भोग लगाएं और फिर जल अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा चालीसा , दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके साथ ही इस मंत्र का करीब 108 बार जाप जरूर करें।


मंत्र- 'ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडा नम:

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