त्वरित इलाज व नियमित दवा खाकर युवक ने दी एमडीआर टीबी को मात

 त्वरित इलाज व नियमित दवा खाकर युवक ने दी एमडीआर टीबी को मात



टीबी मरीज का हाल, खर्च कर दिए लाखों, सरकारी  अस्पताल की दवा से हुए ठीक


समय से जांच और इलाज से नौ माह में टीबी मुक्त हो गया युवक


फतेहपुर। खजुहा ब्लाक के शहजादेपुर गांव के निवासी करीब 33 वर्षीय युवक ने नौ माह नियमित दवा खाकर एमडीआर ( मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस) टीबी को मात दे दी है। युवक ने बताया कि समय से जांच और इलाज का नतीजा रहा कि नौ महीने में पूरी तरह से ठीक हो गया। 

 शहजादेपुर गांव के 33 वर्षीय युवक ने बताया कि वर्ष 2017 में खांसी और बुखार की शिकायत शुरू हुई। खांसी के साथ बलगम भी आने लगा। भूख भी कम लगती थी। गांव के आसपास से मेडिकल स्टोर से दवा लाकर खाया लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था। वजन भी घटने लगा। एक निजी अस्पताल में एक्स-रे व जांच कराया गया। जांच में टीबी की पुष्टि हुई। निजी चिकित्सक से जांच व इलाज कराने में हजारो रूपये खर्च हो गए। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर परिचित ने ही बताया कि सरकारी अस्पताल पर इस बीमारी की निःशुल्क दवा होती है। टीबी हास्पिटल पहुंचे तो सीबीनाट मशीन से भी जांच कराई। रिपोर्ट से एमडीआर टीबी की पुष्टि हुई। 

जिला क्षय रोग केन्द्र के डिस्ट्रिक्ट प्रोग्रामेटिक मैनेजमेंट ड्रग टीबी ( पीएमडीटी) समन्वयक मोहम्मद नसीम ने बताया कि दवा नौ माह तक चली। सबसे अच्छी बात यह रही कि युवक ने दवा नियमित रूप से खाकर एमडीआर टीबी को मात दे दी। अब युवक पूरी तरह से स्वस्थ है। चिकित्सक के बताने के अनुसार एक भी दिन दवा गैप नहीं होने दिया। खानपान और पौष्टिक आहार पर विशेष ध्यान दिया। निक्षय पोषण योजना के तहत मिले 4500 रुपये से सूखा फल, मांस, एवं अन्य पौष्टिक आहार खाने में ही खर्च किया। सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर अजीत सिंह ने बताया कि यदि किसी को भी टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल पर जाकर जांच और इलाज कराएं। जांच और इलाज निःशुल्क होता है। पौष्टिक आहार के लिए इलाज चलने की अवधि तक प्रति माह 500 रूपये भी मिलता है।


यह लक्षण दिखे तो कराए जांच --

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. निशात शहबुद्दीन ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार 14 दिनों से बुखार आता हो, खांसी में खून आता हो, वजन घट रहा हो, थकान महसूस हो रही हो और सांस लेने में तकलीफ़ होती हो तो उसे जांच कराना चाहिए। यह टीबी का लक्षण हो सकता है। पूरे जिले में 26 स्थानों पर बलगम जांच की सुविधा उपलब्ध है।


वर्ष 2017 से अब तक ठीक हो गए 751 एमडीआर रोगी 

डिस्ट्रिक्ट पीएमडीटी समन्वयक ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक 751 एमडीआर टीबी के मरीज ठीक हो गए, जबकि वर्ष 2022 में एमडीआर तथा एक्सडीआर टीबी के 183 मरीजों का इलाज चल रहा है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि वर्ष 2022 में अक्टूबर तक 5525 रोगियों के सापेक्ष 4148 रोगियों को निरूक्षय पोषण योजना के तहत 32 लाख का भुगतान उनके खाते में किया जा चुका है।


वर्ल्ड विजन संस्था ने दिखाई मरीजों को राह

वर्ल्ड विजन जिला समन्वयक शशी मिश्रा ने बताया कि सभी मरीजों को टीबी की जानकारी दी जाती है जिनको दो सप्ताह से अधिक खांसी आती है उनकी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई जाती है। गांवों में बैठकें आयोजित कर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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