बिना नोटिस दिए कृषक सेवा समिति के जर्जर भवन पर प्रशासन का गरजा बुलडोजर
बिना नोटिस दिए कृषक सेवा समिति के जर्जर भवन पर प्रशासन का गरजा बुलडोजर

संवाददाता बांदा । पच्चास वर्षों से  काबिज परिवार की महिलाओं ने एसडीएम के सामने कागज लेकर  न्याय की गुहार लगाती रही ।  महिलाओं ने प्रशासन पर आरोप लगाया की जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल के इसारे पर बिना सूचना के मकान को भारी पुलिस बल के मौजूदगी में ध्वस्त करा  दिया।  करीब 26 वर्षो से  राजेंद्र प्रसाद पांडे बनाम  मध्य कृषक  सेवा सहकारी समिति के बीच मुकदमा चल रहा था  । लेकिन  8 वर्ष पहले  5 सितंबर 2016 को मुकदमा मध्य कृषक का खारिज हो गया था। यह मामला कुछ दिनों तक ठंडे बस्ते पर पड़ा रहा ।  शुक्रवार को अचानक बिना नोटिस एवम सूचना के अपर  जिला सहकारी सेवा समिति के अरुण कुमार तिवारी, सचिव जितेंद्र सिंह भदौरिया  तीन बिल्डोजर के साथ पहुंचे  और जर्जर भवन को गिराने की  कार्यवाही शुरू किया तो विरोध शुरू हो गया ।  एसडीएम रजत वर्मा को जानकारी की कुछ अवैध  कब्जा धारक विरोध कर रहे हैं। शांति व्यवस्था को लेकर  एसडीएम ने नायब तहसील गौरव कुमार को भारी  पुलिस बल के साथ मौके पर भेज  दिया । बुलडोजर  जैसे ही  मकान पर  चला तो  राजेंद्र प्रसाद पांडे जो दोनो आंखों से दिव्यांग है उनके पुत्र अजय कुमार पांडे बहु मंजरी देवी और प्रीति  मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से गुहार लगाती रही जिस मकान पर हम  रह रहे हैं उस मकान को छोड़कर आप अपनी जर्जर भवन को गिरा दें लेकिन प्रशासन ने महिलाओं की एक  नही सुनी और विरोध होने पर महिला पुलिस को भी बुला लिया बुलडोजर के नीचे जान देने जा रहे दोनों महिलाओं को बहला फुसला कर एक किनारे ले गए इसके बाद बुलडोजर ने मकान सहित जर्जर मध्य कृषक सेवा सहकारी समिति को ध्वस्त कर दिया । वही पुलिस विरोध कर रहे अजय कुमार पांडे को  उठा लिया । कोतवाली प्रभारी राजेंद्र कुमार राजावत का कहना है कि शांति व्यवस्था को लेकर उक्त व्यक्ति को उठाया है। दिव्यांग की बहू मंजरी पांडे एवं प्रीति पांडे ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल पर खुला आरोप लगाया कि उन्होंने हमसे आधी जमीन मांगी थी हमने जमीन देने से इनकार किया तो सत्ता की हनक और प्रशासन की मिली भगत के चलते हमारे मकान को धस्त कर दिया। साथ यह भी आरोप लगाया लगभग 5 लाख रुपए का गृहस्ती का सामान भी मलवे  दब कर बर्बाद हो गई है साथ यह भी कहा कि जिला उप जिलाधिकारी के सामने कागज लेकर में न्याय की गुहार लगाई लेकिन सत्ता के दवाब में नजर अंदाज कर भागा दिया । इस कार्यवाही से कस्बे सही क्षेत्र में  चर्चा का विषय बना हुआ है। अपर जिला सहकारी अधिकारी अरुण कुमार तिवारी का कहना है कि राजेंद्र प्रसाद पांडे समिति में कर्मचारी थे । 220 प्रति माह किराए पर रहते थे । किसी भी राष्ट्रीय अखबार में  नीलामी टेंडर के  प्रकाशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ बोलने से बचते रहे और कहा कि यह एक स्थानीय अखबार पर प्रकाशित कराया गया है।  एसडीएम रजत वर्मा मौके पर पहुंचकर पीड़ित महिलाओं ने सही साक्ष्य  दिया ।  कहा कि महिलाओं का आरोप गलत है। जमीन समिति की है जर्जर भवन हो चुके थे ।
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