अब फतेहपुर मंडल की बारी: इतिहास खुद माँग कर रहा न्याय
फतेहपुर।उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक मानचित्र में एक और ऐतिहासिक बदलाव की ज़मीन तैयार हो रही है। 1950 में गठित इलाहाबाद मंडल, जिसमें कभी झाँसी से लेकर कानपुर, बांदा, हमीरपुर और फतेहपुर तक के जिले शामिल थे, अब टुकड़ों में बंटकर कई नए मंडलों में बदल चुका है। झाँसी मंडल, कानपुर मंडल और चित्रकूट धाम मंडल जैसे क्षेत्रीय प्रशासनिक इकाइयाँ बन चुकी हैं — और अब फतेहपुर को उसका न्याय मिलने का समय आ गया है।
🕰️ इतिहास गवाह है...
1950 में जब उत्तर प्रदेश का गठन हुआ, तब इलाहाबाद मंडल में शामिल थे:
इलाहाबाद (अब प्रयागराज)
फतेहपुर
कानपुर
बांदा
हमीरपुर
झाँसी
लेकिन समय के साथ प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ और उपरोक्त जिलों में से अधिकांश को अलग मंडलों के रूप में मान्यता दी गई:
झाँसी मंडल (1997)
कानपुर मंडल
चित्रकूट धाम मंडल (2000)
अब केवल फतेहपुर ऐसा जिला बचा है जो ऐतिहासिक, भौगोलिक और प्रशासनिक सभी दृष्टिकोण से मंडल बनने का हक़दार है, लेकिन आज भी उपेक्षित है।
प्रस्तावित फतेहपुर मंडल के जिले:
1. फतेहपुर (मुख्यालय)
2. खागा (नया जिला प्रस्तावित, खागा तहसील में जिला बांदा की कमासिन ब्लॉक जोड़ते हुए )
3. जहानाबाद घाटमपुर (पूर्वी कानपुर देहात से)
यह मंडल स्थानीय प्रशासन को अधिक सक्षम, जनसंवेदनशील और विकासोन्मुख बनाएगा।
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय बुंदेलखंडी ने कहा इतिहास गवाह है कि फतेहपुर कभी इलाहाबाद मंडल का प्रमुख हिस्सा था, आज वही ज़िला चित्रकूट धाम, कानपुर और प्रयागराज मंडल के बीच पिस रहा है। जब झाँसी, बांदा और कानपुर जैसे जिलों को उनके प्रशासनिक अधिकार मिल सकते हैं, तो फतेहपुर क्यों नहीं?
अब समय आ गया है कि फतेहपुर को भी स्वतंत्र मंडल का दर्जा मिले। खागा, जहानाबाद और घाटमपुर को जोड़कर एक नए मंडल का गठन प्रशासनिक दृष्टि से भी उचित और जनहितकारी निर्णय होगा।
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति 10 अगस्त से माँग को लेकर एक व्यापक जनसम्पर्क शुरू करेगी।