ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने से, समय से पहले प्रसव के मामले बढ़ेंगे

ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने से, समय से पहले प्रसव के मामले बढ़ेंगे


(न्यूज़)।वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि का असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ रहा है।गर्भावस्था के दौरान उच्च तापमान के संपर्क में आने पर उनकी कोख से मृत्यु या प्रीमैच्योर शिशु के पैदा होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।एक हालिया शोध में यह बात सामने आई है।शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी पर समयपूर्व या मृत प्रसव होने का खतरा 5 फ़ीसदी तक बढ़ जाता है।दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटर्सरैंड के शोधकर्ताओं की टीम ने कहा,यह प्रभाव छोटे लगते हैं लेकिन इन निष्कर्षों का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खासा प्रभाव दिख सकता है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर में ज्यादा तापमान आम बात होती जा रही है।समयपूर्व जन्मे बच्चों को श्वास संबंधी परेशानीयां होती हैं।इसके अलावा उन्हें खिलाने में काफी समस्या आती है।इन बच्चों में संक्रमण होने का जोखिम ज्यादा होता है।ऐसे बच्चों में शारीरिक,विकास संबंधित अक्षमता,सेरिब्रल पेलेसी और दृष्टि दोष पनप सकते हैं।समय पूर्व प्रसव पर किए गए 40 शोधों में यह दर्शाया गया है कि यह कम तापमान की तुलना में उच्च तापमान पर ज्यादा सामान्य था।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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