पुलिस मुठभेड़ पर प्रश्नचिंह, डीएम ने दिए जांच के आदेश

पुलिस मुठभेड़ पर प्रश्नचिंह, डीएम ने दिए जांच के आदेश


सुलतानपुर ।अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहे उप निरीक्षक अमरेंद्र सिंह का बल्दीराय थाना अध्यक्ष के तौर पर नया कारनामा सामने आया है। अंबेडकरनगर के हर्ष फायरिंग मामले से जोड़ते हुए थानाध्यक्ष ने पुलिस से युवक की आमने-सामने की भिड़ंत दर्शाते हुए जान से मारने की धमकी देने और रंगदारी वसूलने का मुकदमा पंजीकृत कर दिया। मामले में ग्रामीणों का गुस्सा फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए फूट पड़ा है। पुलिस प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के शुक्रवार को नारे लगाए गए। नागरिकों के गुस्से और अभियुक्त बनाए गए युवक के माता-पिता की पीड़ा सुन डीएम रवीश गुप्ता ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। चकबंदी अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने के मामले से चर्चा में आए तत्कालीन घंटाघर चौकी इंचार्ज उप निरीक्षक अमरेंद्र सिंह एक बार फिर बल्दीराय थाना क्षेत्र से सुर्खियों में है। बहरहाल ग्रामीण कह रहे हैं कि ना कोई भिड़ंत हुई और ना ही कोई गोलीबारी। अगर ग्रामीणों की बात सही है तो पुलिसिया कार्यशैली पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं। खाकी दागदार हुई है।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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