रिसर्च में किया गया दावा- गंदगी में रहने वाले लोगों की कोरोना से हुई कम मौत

रिसर्च में किया गया दावा- गंदगी में रहने वाले लोगों की कोरोना से हुई कम मौत


(न्यूज़)।देश में कोरोना संक्रमण के मामले भले ही कम हो गए हों लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. कोरोना वायरस पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जिन राज्यों में साफ-सफाई का स्तर खराब है और वहां पर पानी की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है वहां पर कोरोना का संक्रमण कम असरदार रहा है. ऐसे राज्यों में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा विकसित राज्यों से काफी कम रहा है.
सेंटर फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाले अपने शोध में दावा किया है कि लो मिडिल इनकम वाले देशों में पैरासाइट और बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी हमेशा से रही है. ऐसे में यहां के लोगों में इन बैक्टीरिया से लड़ने के लिए पहले से इम्यून सिस्टम तैयार हो जाता है. शरीर में होने वाले इस बदलाव को हायपोथिसिस कहते हैं. वैज्ञानिकों ने कहा है कि जो देश पहले से इस तरह के संक्रमण से जूझ रहे हैं वहां पर कोरोना से मौत के मामले पहले से काफी कम हैं।


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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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