झूठ की दुकान मेरी चल रही थी शान से, एक सच क्या बिका की चालान मेरा हो गया


झूठ की दुकान मेरी चल रही थी शान से, एक सच क्या बिका की चालान मेरा हो गया


 गिरिराज शुक्ला

  बिदकी फतेहपुर 

साहित्यिक सांस्कृतिक धर्म कला परिषद बरिगवां रसूलपुर की ओर से एक विशाल कवि सम्मेलन का  आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में कानपुर से पधारे प्रमुख साहित्यकार एवं कवि सुरेश चंद्र गुप्त "राजहंस" व  श्रवण कुमार पांडे "पथिक" को संस्था की ओर से शाश्वत अभिनंदन करते हुए सम्मानित किया ।गया मालूम हो कि संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष होने वाले कवि सम्मेलन में कवियों को सम्मानित किए जाने का सिलसिला बराबर जारी रहता है। इसी कड़ी में संपन्न हुए कवि सम्मेलन में कानपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार व कवि सुरेश चंद्रगुप्त "राजहंस" को सालवा प्रशस्ति पत्र भेंट कर संस्था के संस्थापक भैया जी अवस्थी करुणाकर द्वारा सम्मानित किया गया।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि रमेश मिश्र "आनंद" व विशिष्ट अतिथि नरेश गुप्ता"मोहन" ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर व दीप प्रज्जवलित कर किया। शुभारंभ में कवि मनोज उमराव ने वाणी बंदना के साथ मां सरस्वती का आह्वान किया। कानपुर से पधारे आध्यात्म साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर रमेश मिश्र "आनंद" ने अपनी कविता के माध्यम से जीवन जीने की कला पर प्रकाश डालते हुए कहा"कुंज में कलियां खिली हैं,भ्रमर मन मुस्कुरा रहा हैं।होके आल्हादित अनोखी गीतिकाएं गा रहा है।

कवि शिव किशोर निगम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कसीदे पढ़ते हुए कहा कि"मोदी छोड नहीं कोई अपना ,बिन मोदी जीवन है सपना। कवि सम्मेलन के संचालक सुरेंद्र गुप्त "सीकर" ने ने बेटियों की सराहना करते हुए कहा कि " ओढ़ कर नींद सारा जहां सो गया, राह पापा की तकती रही बेटियां "किसी तरह उन्होंने सच और झूठ पर प्रहार करते हुए कहा कि "खोलकर दुकान बैठा झूठ सारे बिक गए, एक तन्हा सच लिए शाम तक बैठा रहा"।

इसी क्रम में एक जाने-माने साहित्यकार, कवि, शायर व गीतकार सुरेश चंद्रगुप्त "राजहंस"ने कहा कि " हम अकेले हैं तुम भी अकेले प्रिये, रोज लगते नहीं ऐसे मेरे प्रिये।यह हमारा मिलन कुछ नया तो नहीं, याद बचपन करो संग खेले प्रिये। तुम हमारे लिए हम तुम्हारे लिए, बूढ़े बरगद से वरदान लें, तुम हमारा कहा मान लो, हम तुम्हारा कहा मानले।"

उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में झूठ का ही बोलबाला है इसे कुछ इस तरह शव्दों पिरोया"झूठ की दुकान मेरी चल रही थी शान से ,एक सच क्या बिका कि चालान मेरा हो गया"।

कविता पाठ की श्रृंखला में हास्य कवि राजेश बाजपेई, भैया जी अवस्थी करुणाकर, डा.रवीन्द्र त्रिपाठी,राजेंद्र कुमार मिश्र, राजाराम योगी, शिवम यादव, राकेश चंद्र चंदर, लाल जी अवस्थी जयेंद्र ,राज किशोर शुक्ला, शिव दत्त त्रिपाठी ,होरीलाल ,आकांक्षा जी ,हम्स सईदा खातून व अंजलि उमराव आदि कवियों ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी और श्रोताओं की तालियां बटोरी।

यह कवि सम्मेलन तंत्राचार्य स्वर्गीय राधा रमण मिश्र "मिसिर दादा" ,आशु कवि मानस मार्तंड स्वर्गीय पंडित कुंज बिहारी शुक्ला "राघवानंद" ,जनप्रिय पुलिस उपमहानिरीक्षक स्वर्गीय जमुना नारायण अवस्थी व मां माटी के बहुचर्चित खंडकाव्य के रचयिता स्वर्गीय कमलाकांत अवस्थी जी की पुण्यतिथि पर आयोजित किया जाता है।

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