संदिग्ध परिस्थितियों में महिला ने फांसी लगाकर जान दी

 संदिग्ध परिस्थितियों में महिला ने फांसी लगाकर जान दी



फतेहपुर।थरियांव थाना क्षेत्र के करनपुर मजरे रामपुर थरियांव निवासी वरुण कुमार उर्फ राजू लोधी की पत्नी मधू देवी उम्र 19 वर्ष ने सुबह 11 बजे के लगभग घर के अंदर बंद कोठरी में छत की बीम में सीमेंट की बोरी की रस्सी से फंदा बनाकर गले में डाल कर फांसी लगाकर जान दी।

26 फरवरी 2020 को शादी हुई थी।बुध‌इयापुर थाना मलवां में सूचना पाकर मौके पर आए।बेसुध पिता राजेंद्र सिंह लोधी मां रामादेवी और भाई जितेंद्र कुमार का रो रोकर बुरा हाल है।मधू देवी के कोई संतान नहीं थी।दो बार गर्भ खराब हो चुका था।

सूचना पर थरियांव पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

मायके पक्ष से अभी तक कोई भी आरोप नही लगाया गया है।इं उपेन्द्र नाथ राय का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही होगी।

पति वरुण कुमार उर्फ राजू लोधी गांव में ही रहकर माता पिता के साथ खेती किसानी का कार्य करता है।घटना के समय माता पिता खेतों में काम कर रहे थे। और वरुण कुमार उर्फ राजू लोधी थरियांव कस्बे में खाद लेने गया था। वापस घर लौटने पर देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है। तो आवाज दिया लेकिन कोई नहीं सुना दरवाजे के सांसा से देखा तो दंग रह गया।

Popular posts
अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
चित्र
तू मेरी गीता पढ़ले मैं पढ़ लू तेरी कुरान, आपस मे भाई चारा निभा के बनायेगे नया हिंदुस्तान
चित्र
पाल सामुदायिक उत्थान समिति की ब्लाक इस्तरीय संगठनात्मक बैठक हुई सम्पन्न
चित्र
कानपुर में ठेले पर पान, चाट और समोसे बेचने वाले 256 लोग निकले करोड़पति
चित्र
योगी सरकार लोगों को देने जा रही फ्री वाईफाई सुविधा
चित्र