सिमटते कार्यकाल में बादशाह बने सचिव प्रधानोंके लिए खड़ी कर रहे मुसीबत

 सिमटते कार्यकाल में बादशाह बने सचिव प्रधानोंके लिए खड़ी कर रहे मुसीबत



सरकारी खजाने को ठिकाने लगाने के लिए की जा रही हर जुगत जुगाड़


सचिवों के बदले तेवर तो अनगिनत प्रधान कर रहे हथ जोड़ी


कोई कराए गए काम में पैसा फंसने की दे रहा दुहाई तो किसी को चुनाव में खर्च होने वाले पैसे की चिंता 


सेक्रेटरी अपनी ताक में,प्रधानों को दिए हैं लालीपाप,चेक काटने के लिए लगवा रहे चक्कर


विकासखंड मुख्यालय से लेकर विकास भवन कार्यालय तक की प्रधान कर रहे परिक्रमा,नेताओं से भी करा रहे फोन


क्षेत्र पंचायतों में भी सरकारी खजाने को ठिकाने लगाने का चल रहा बड़ा खेल


बीडीओ,प्रधानों व सचिवों की तिकड़ी ने जिले में खूब खिलाए हैं गुल


अधिकारियों की जांचों में भी भ्रष्टाचार की खुलती रही है पोल

             

फतेहपुर।ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर से पूरा होने जा रहा है।गांवों के विकास के लिए शासन ने जो धनराशि ग्राम पंचायतों को मुहैया कराई है उसे ठिकाने लगाने के लिए अंतिम समय में प्रधान व सचिव एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है प्रधान सचिवों की परिक्रमा तेज किए हुए हैं। घर से लेकर दफ्तर तक आवाजाही व मिन्नतें शुरू हैं। ग्राम प्रधान जहां खातों में पड़ी धनराशि को ठिकाने लगाने की हर जुगत जुगाड़ लगा रहे हैं वहीं सचिवों का रवैया बदला बदला नजर आ रहा है।इसी का नतीजा है कि सचिवों के दर्जनों प्रधान हाथ पैर तक जोड़ रहे हैं।कोई कराए गए कामों में पैसा फंसने की दुहाई दे रहा है तो कोई चुनाव में खर्चा होने की बात कर रहा है। हो कुछ भी लेकिन विकासखंड मुख्यालयों से लेकर  विकास भवन तक प्रधानों की भीड़ देखी जा सकती है। *दर्जनों सेक्रेटरी तो ऐसे हैं जिन्होंने कमीशन का परसेंटेज तक बढ़ा दिया है।पंचायत चुनाव की अभी घोषणा नहीं हुई है। *कार्यकाल समाप्त होने वाला है लेकिन बड़ी तिकड़म बाजी से सरकारी खजाने को लूटने का सिलसिला तेजी से जारी है।शासन द्वारा 25 दिसंबर से पहले ग्राम पंचायतों के कामों के संचालन को लेकर 23 या 24 दिसंबर में कोई ना कोई दिशा निर्देश जारी किए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

जिले में 13 विकास खंडों की 840 ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर सरकारी खजाने को लूटने खूब खेल खेला गया। बीडिओ,सचिव व ग्राम प्रधानों की तिकड़ी ने सरकारी खजाने का जमकर बंदरबांट किया। कई जगह उच्चाधिकारियों ने जांच की तो मामले भी खुलकर सामने आ गए और उन पर बड़ी कार्रवाईयां भी की गई हैं।अभी भी एक सैकड़ा से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें विकास के नाम पर सरकारी खजाने की की गई लूट के सबूत रखे हैं।कई जगहों में तो प्रधानी का चुनाव लड़ने के भावी प्रत्याशी सही मौके की तलाश जांच के लिए कर रहे हैं।बावजूद इसके सरकारी खजाने के लूटने का सिलसिला अभी बंद नहीं हुआ है।

खास बात यह है की हाल ही में शासन ने ग्राम पंचायतों के विकास के लिए अपने खजाने का पिटारा खोला था और *ग्राम पंचायतों से लेकर क्षेत्र पंचायत तक धन दिया गया था।अब इसी को ठिकाने लगाने का सिलसिला तेजी से शुरू है। विकास के नाम पर क्षेत्र पंचायतों में भी कम बड़े खेल नहीं हो रहे हैं यहां भी खजाने को लूटने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। गाँवों में प्रधान हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि जाते-जाते खाते को खाली कर दें।वहीं सेक्रेटरी दोनों हाथों में लड्डू लेकर बैठे हैं। प्रधानों को दिलासा दे रहे हैं लेकिन काम करने का उनका तरीका ही बदल गया है।यह उम्मीद जगी है कि कहीं प्रधानों के अधिकार पूरी तरह से सीज हो गए तो बचे धन का उपयोग हो ना हो वह अपने हिसाब से ही कर लें।इसके चलते दर्जनों सचिव अपने प्रधानों को चेकों को काटने के लिए चक्कर लगवा रहे हैं।खबर तो यहां तक है कि ऐसे न जाने कितने ग्राम प्रधान हैं जो सचिवों की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं!अनुनय-विनय कर रहे हैं!धन को निकालने की हथजोड़ी तक कर रहे हैं।इतना ही नहीं चुनाव में खर्चे होने की दुहाई दी जा रही है, कमीशन का परसेंटेज बढ़ाने का भी लालच दिया जा रहा है लेकिन कई घाघ सचिव हैं जो मौके की नजाकत को भांप रहे हैं और प्रधानों को लिफ्ट ही नहीं दे रहे हैं। खातों में पड़े पैसों को ठिकाने लगाने के लिए ग्राम प्रधान विकासखंड मुख्यालय से लेकर विकास भवन कार्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं। *कई अपने आकाओं से फोन तक करा रहे हैं।कभी त्यौरी चढ़ाए रखने वाले प्रधान बैकफुट पर हैं।सचिवों की आरजू मिन्नत कर रहे हैं।हो कुछ भी,ऊंट किसी भी करवट बैठे लेकिन हकीकत में लूट सरकारी खजाने की ही होनी है।अब देखना यह है कि सरकारी धन को लुटने से बचाने के लिए उच्चाधिकारी क्या जतन करते हैं

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