बनारस मंडल मे मुख्य अभियंता ने जारी किया फरमान फिर प्रयागराज मंडल का क्यों हो रहा है अपमान

 बनारस मंडल मे मुख्य अभियंता ने जारी किया फरमान फिर प्रयागराज मंडल का क्यों हो रहा है अपमान



प्रयागराज मंडल के तत्कालीन मुख्य अभियंता का हवा में उड़ रहा है आदेश


आयेंगे नये हाफिज या फिर मलाईदार सीट पर टी.जी.टू ही रहेंगे काबिज


फतेहपुर। प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर चरमराई विधुत व्यवस्था को पटरी परलाने के लिए बनारस मंडल के मुख्य अभियंता ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि 28 फरवरी तक अधिशाषी अभियंताओ के कायार्लय मे कार्यरत जितने भी टी.जी.टू विधुत कर्मी हैं उनको हटा कर पदमुक्त कर दिया जाये। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके आदेश का समय रहते पालन नहीं किया गया तो सम्बन्धित अधिकारी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। मालूम रहे कि ऐसा ही एक आदेश सन् 2018 मे इलाहाबाद मंडल के तत्कालीन मुख्य अभियंता ने सभी अधिशासी अभियंताओ को भी निर्देशित किया था कि कार्यालय मे टी.जी.टू किसी भी दशा में कार्य करते नहीं मिलना चाहिए और इनको तत्काल प्रभाव से कार्यालय से हटा कर जहां इनकी सेवा की जरूरत है वहां पर तैनात किया जाये। किन्तु तत्कालीन मुख्य अभियंता के आदेश को अधिशासी अभियंताओ ने अमल करने के बजाय उस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया था और आज तक वह आदेश लागू नहीं हो सका है। हैरत की बात तो यह है कि बनारस मंडल के मुख्य अभियंता वितरण ने अपने मंडल में कार्यालयो से टी.जी.टू को हटाने का निर्णय ले चुके है और बनारस मंडल में उनके निर्देश का पालन भले ही सार्थक होता नजर आने लगे किन्तु प्रयागराज मंडल में आज भी पुरानी परम्परा लागू होती चली आ रही हैं।

प्रयागराज मंडल के कार्यावाहक मुख्य अभियंता ने कार्यालयओ से टी.जी.टू को हटाने तथा उनके स्थान पर बाबूओ को तैनाती दिये जाने के सम्बंध में कोई नया आदेश नहीं जारी किया है। किन्तु बनारस मंडल मे हुए आदेश को लेकर मलाई दार सीटों पर बैठे टी.जी.टू ओ को जैसे सांप सुंघ गया हो और उनकी कुर्सी पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। बहरहाल कुछ भी हो यदि बनारस मंडल जैसा आदेश प्रयागराज मंडल में भी लागू हो गया तो इसका प्रभाव सबसे ज्यादा विधुत वितरण खन्ड प्रथम मे पड़ेगा क्योंकि इस कार्यालय में जितने भी टी.जी.टू है वह सब मलाइदार सीट पर ही काबिज है। अब देखना यह है कि प्रयागराज मंडल में यह आदेश नये सिरे से लागू होगा या फिर 2018 मे तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा जारी किया गया आदेश हवा मे उड़ता रहेगा।