झुग्गी झोपडियों में पहुंचकर सौम्या जगा रही शिक्षा की अलख

 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष 


झुग्गी झोपडियों में पहुंचकर सौम्या जगा रही शिक्षा की अलख


 


फतेहपुर। क्रांति फाउंडेशन की डायरेक्टर मिस सौम्या सिंह अब तक 10 से भी ज्यादा रेप विक्टिम्स को न्याय दिलाने में उनकी मदद कर चुकी है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करते हुए वह अब तक पूरे फतेहपुर डिस्ट्रिक्ट में अनेक वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम कर चुकी हैं। झुग्गी झोपड़ियों से लेकर उन मलिन बस्तियों में जहां सभी समाज के लोग जाने से कतराते हैं सौम्या बहुत प्यार से खुशी-खुशी वहां जाकर कपड़े किताबें खान-पान का सामान बांटने की मुहिम अक्सर चलाती रहती हैं। इसी क्रम में सौम्या 2  मलिन बस्तियों के 70 बच्चों को निःशुल्क पढ़ाती है।

एक रेप विक्टिम के बच्चे का एडॉप्शन प्रोसेस कंप्लीट किया हैं। एक तरफ जहां पीड़ितों को मदद मिली उसी जगह को दंपति जिन्हें सालों से बच्चे की ख्वाहिश थी वह पूरी हो गई, एडॉप्शन पूरा करने के बाद दंपती के चेहरे पर आंसू के साथ मुस्कान देखकर सुकून तो मिला ही और उसके एहसास से लगा कि शायद मैं कुछ अच्छा काम कर रही हूं। आज 2 साल में सौम्या के काम के बारे में छोटे से छोटे गांव से लेकर जिला स्तर पर बात होती है। सौम्या अपनी टीम के साथ लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन, इलेक्शन कैंपेन के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन समय-समय पर करती रहती है। सौम्या ने अपनी इस सफर के दौरान करप्शन, ड्रग एडिक्शन, रेप्स, वूमेन एंपावरमेंट, एजुकेशन जैसे कई मुद्दों पर काम किया है और इस काम में उन्हें कई बार रुक जाने की, पीछे हट जाने की धमकियां भी मिली हैं पर लोगों के लिए लड़ते रहने का दृढ़ संकल्प सौम्या को कभी रोक नही पाया।

 अमर क्रांति फाउंडेशन की ओर से बकन्धा और नाउवाबाग की कंजड़ बस्तियों में निःशुल्क पाठशाला निरन्तर 6 माह से वंचित निर्धन मासूम बच्चों के मध्य चलाई जा रही है। फाउंडेशन की संचालिका सौम्या सिंह पटेल बताती है कि ये दोनों बस्तियां शिक्षा से पूरी तरह कटी हुई थी बस्तीवासियों को शिक्षा का महत्व ही नही पता था, उनको शिक्षा की महत्ता समझाना और उनके बच्चों को शिक्षा से जोड़ना बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन उन बच्चों की लगन  देखकर उनका हौसला बढ़ता गया। फाउंडेशन को सरकार या किसी अन्य द्वारा कोई सहयोग प्राप्त न होने के बाद भी निरन्तर पाठशाला चलाए जाने का कारण सिर्फ बच्चों की लगन एवं मेहनत है, निरक्षर बच्चे यदि शिक्षित होकर कुछ बन गए तो अपना जीवन सफल समझेंगी। बच्चों को स्टेशनरी, स्वेटर, मोजे आदि उपलब्ध करवाए, इस पाठशाला में संगीता सचान, प्रीति गुप्ता, ऋषि रंजन, मोना ओमर, विवेक मिश्रा, संदीप त्रिपाठी, प्रतिभा प्रजापति, पूजा वर्मा आदि लोग समय निकालकर बच्चों के मध्य जाकर पढ़ाते हैं।

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