वीरांगना हर राज्य में करेगी विस्तार, बनाएंगी कमेटियां


 वीरांगना हर राज्य में करेगी विस्तार, बनाएंगी कमेटियां


न्यूज ऑफ फतेहपुर

कानपुर,22जुलाई।कानपूर के प्रेसिडेंट होटल कांफ्रेंस हॉल में वीरांगना (विशाल काश्यप की एक पहल) की कानपूर सेंट्रल कमेटी की स्थापना हुईं और उन्हें शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में वीरांगना के राष्ट्रीय संस्थापक विशाल काश्यप  उपस्थित रहे और मुख्य अतिथि गोरक्षनाथ मन्दिर की पुजारी पंडित प्रवीण शास्त्री  ने शपथ पाठ कराया। विशाल काश्यप  ने कहा के वीरांगना भारत के हर राज्य में अपनी विस्तार कर रही है। पर खास करके उत्तर प्रदेश के हर जिले में अपनी सशक्त कमेटी बना रही है। वीरांगना खुद सैनिटरी नैपकिन बनाती है और अपनी सदस्यों के माध्यम से उसको गांव गांव तक पहुंंचाती है। वीरांगना ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिंक लेटर बॉक्स की शुरुवात की है जिसे हर शहर में लगाया जा रहा हैं और इस मुहिम में महिला आयोग और प्रशासन की भरपूर मदत भी मिल रही है।आज जिन सदस्यों को शपथ दिलवाया गया उनमें साक्षी सिंह, प्रतिमा गुप्ता, शोभा गुलाटी, सिमरन कौर, प्रीति शुक्ला, गीता पांडे, रचना कपूर, खुशी झा, साक्षी शर्मा, निधि भटला, पूनम सिंह और शोभा कुशवाहा शामिल है…कार्यक्रम मै करीबन 100 लोग शामिल हुए और कॉविड के गाइडलाइन का पूरा ध्यान रखा गया…

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अब बुजुर्गों और माता पिता की देखभाल के लिए मिलेगा 10 हजार रुपये, मोदी सरकार बदलेगी नियम न्यूज़।माता-पिता और बुजुर्गों की देखरेख के लिए अब केंद्र सरकार नया नियम लाने जा रही है. दरअसल, मेंटनेंस और वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 पर मानसून सत्र में फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि सोमवार से ही मानसून सत्र शुरू हो चुका है। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन (अमेंडमेंट) बिल 2019 केंद्र सरकार के एजेंडा में काफी समय से था. मानसून सत्र की शुरुआत में ही केंद्र सरकार इस बिल को लेना चाहती है. दिसंबर 2019 में पास कर दिया गया था ये नियम। वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में पास कर दिया था। इस बिल का मकसद लोगों को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को छोड़ने से रोकना है। विधेयक में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, सुरक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ उनके भरण-पोषण और कल्याण का प्रावधान बनाया गया है। देश में कोविड-19 महामारी की दो विनाशकारी लहरों के मद्देनज़र आने वाला यह विधेयक मौजूदा सत्र में संसद द्वारा पास होने पर वरिष्ठ नागरिकों और अभिभावकों को अधिक पावर देगा. इस बिल को संसद में लाने से पहले कई बदलाव किये गये हैं. जानें इस नियम से संबंधित अहम जानकारी- वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स और सीनियर सिटिजन बिल कैबिनेट ने दिसंबर 2019 में बच्चों का दायरा बढ़ाया गया है। इसमें बच्चे, पोतों (इसमें 18 साल से कम को शामिल नहीं किया गया है) को शामिल किया गया है. इस बिल में सौतेले बच्चे, गोद लिये बच्चे और नाबालिग बच्चों के कानूनी अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अगर ये बिल कानून बन जाता है तो 10,000 रुपये पेरेंट्स को मेंटेनेंस के तौर पर देने होंगे. सरकार ने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और पेरेंट्स की आय को ध्यान में रखते हुए, ये अमाउंट तय किया है। कानून में बायोलिजकल बच्चे, गोद लिये बच्चे और सौतेले माता पिता को भी शामिल किया गया है। मेंटेनेस का पैसा देने का समय भी 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
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