तिल का ताड़ बनाने में माहिर फतेहपुर पुलिस ने बनाया ताड़ का तिल

 तिल का ताड़ बनाने में माहिर  फतेहपुर पुलिस ने बनाया ताड़ का तिल



अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, बिक्री या धर्म परिवर्तन के मामले का मामूली धारा में किया चालान


जम्मू के दोनों आरोपियों के आधार कार्ड फर्जी होने पर भी की गई अनदेखी


एसडीएम कोर्ट से बगैर आईडी के मुचलके पर छूटे चारों शातिर


कोतवाल ने कहा कोई तहरीर देने वाला नहीं था क्या करता


किशोरी को बरगलाकर जम्मू ले जा रहे थे चार युवक, एक युवती की भी भूमिका संदिग्ध


कोतवाली पुलिस की घोर लापरवाही पर पुलिस कप्तान ने बैठाई जांच


फतेहपुर। व्यवस्था गत ढांचे में सुरक्षा के बाबत संपूर्ण जिम्मेदार पुलिस की घोर लापरवाही प्रकाश में आई है। वैसे तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर मानी जाने वाली पुलिस ताड़ का तिल कैसे बना देती है, इसका एक बड़ा मामला जनपद की आबो-हवा में तेज़ी से तैर रहा है। योगी की पुलिस इतने बड़े मामले में इतनी गैर जिम्मेदार हों सकती है, इस पर विश्वास करना आसान नहीं है, किन्तु यह कटु सत्य है कि जिम्मेदारों की संदिग्ध भूमिका के चलते ऐसा हुआ है...! संभावित धर्मांतरण से जुड़े बड़े मामले को सिर्फ़ 151 की धारा में निपटा देना और एसडीएम कोर्ट से बगैर आईडी के मुचलके पर रिहा किया जाना सिस्टम की खामियों का जीता जागता उदाहरण हैं।

उल्लेखनीय है कि धर्मान्तरण किंग डा. उमर गौतम का यह (फतेहपुर) गृह जनपद है और यहां से उसके गहरे तार जुड़े होने से यह जनपद काफ़ी समय से "हाट स्पाट" बना हुआ है, बावजूद इसके इस मामले की गंभीरता को दरकिनार कर कोतवाली पुलिस ने जिस तरह की घोर लापरवाही की, उससे पुलिस और एसडीएम की भूमिका पर उंगलियां उठना लाज़िमी है।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार विगत 25/26 अगस्त की रात्रि लगभग 2.30 बजे शादीपुर चौराहे से पुलिस के हत्थे चार युवक चढ़े जो दो बाइको में सवार होकर एक किशोरी को लेकर कहीं जा रहे थे। चार युवक, एक किशोरी के साथ देख मामला हरिहरगंज चौकी इंचार्ज विजय त्रिवेदी को संदिग्ध लगा। उन्होंने सभी को रोका। पूछताछ की तो अलग अलग तरह के बयान सामने आए। पहले भाई बहन बताया फिर रिश्तेदार फिर दोस्त, बाद में असलियत सामने आई कि दो युवक जो जम्मू के रहने वाले हैं, फ़तेहपुर के दो युवकों व एक युवती की मदद से किशोरी को ट्रेन से जम्मू लेकर जा रहे थे। पहले किशोरी ने भी अपने आपको पांडेय बताया, बाद में वह जोनिहा के करीब एक गांव की दिवाकर निकली। जो पढ़ाई के नाम पर शहर के राधानगर इलाक़े के एक इण्टर कालेज के हॉस्टल में रह रही थी। जिसे फेसबुक के माध्यम से फंसाकर उसका ब्रेन वाश कर जम्मू ले जाया जा रहा था। ले जाने का उद्देश्य प्रेम जाल में फंसाकर अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, बिक्री या धर्म परिवर्तन भी हो सकता है।

कहा़ जा सकता हैं कि पुलिस की सक्रियता यह रही कि ढ़ाई बजे रात को गश्त के दौरान एक बड़ा अपराध होने से तो बचाया गया किन्तु घोर लापरवाही का आलम यह रहा कि सभी आरोपियों को महज 151 में चालान करके जाने दिया गया! जबकि कोतवाली पुलिस यह भी अच्छी तरह जानती थी कि जम्मू के दोनो युवको के आधार कार्ड बार कोड स्कैन में सही साबित नहीं हुए फिर भी तहरीर कौन दे, जिम्मेदारी कौन ले इस चक्कर मे बड़े अपराध के फिराक में आये चारो आरोपी आसानी से बचकर निकल गए। यह जिम्मेदारी न चौकी के एसआई ने निभाई और न ही कोतवाली प्रभारी ने। सब अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए और कहा कि कोई तहरीर देने वाला नहीं था इसलिए 151 में चालान करना पड़ा।

उधर सभी आरोपियों की पोल एसडीएम के यहां 151 की मुचलके (जमानत) में लगे दस्तावेजो से खुल गई। जिसमें सूत्रों के अनुसार चार आरोपियों में तीन मुस्लिम थे। जबकि जम्मू के दोनो समेत सभी आरोपियों की जमानत बिना आई डी लगाए सिस्टम के चलते हो गई। कोतवाली पुलिस तो पूरा मामला ही जैसे पी गई। चलानी रिपोर्ट में किसी बात को लेकर दो पक्षों के विवाद में आमादा होने का हवाला दिया गया है, क्या बात है, वाह री योगी की पुलिस।

बताते चलें कि जब ये चारों संदिग्ध युवक पुलिस हिरासत में थे तो एक और संदिग्ध युवती कोतवाली आई, जिसने कई बार हवाला बदल बदल कर पैरवी भी की थी, उसके साथ एक तगड़ी सिफारिश भी थी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि उसके बाद ही  पुलिस ने मामले को जैसे तैसे निपटा दिया।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़ जिन चार युवकों का 151 में चालान किया गया, उनमें विनोद सिंह पुत्र बलवंत सिंह निवासी ज़िला ऊधमपुर जम्मू कश्मीर, नीरज सिंह पुत्र विट्ठू राम निवासी ज़िला ऊधमपुर जम्मू कश्मीर के हैं, जिनका हाल - मुकाम फर्जी होने की बात कहीं जा रही  हैं, ऐसी संभावनाएं बलवती है कि दोनों युवक गैर हिन्दू हैं और पहचान छिपाकर फेसबुक के माध्यम से भोली भाली लड़कियो को बरगलाकर ले जाते हैं।

एक अन्य युवती के जरिए पहले से भी यहां से इनके तार जुड़े होने की बात कही जा रही है। इनके साथ साथ दो अन्य  स्थानीय शाह आलम पुत्र अहमद रज़ा निवासी गडरियन पुरवा फतेहपुर, रोहित कश्यप पुत्र स्व. जयपाल सिंह कांशीराम कालोनी, फतेहपुर को एसडीएम कोर्ट से निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इनके मुचलके के साथ पत्रावली में किसी प्रकार की कोई आईडी का संलग्न न होना प्रकरण के प्रति जिम्मेदारों का अत्यंत गैर जिम्मेदाराना रवैया जीता जागता उदाहरण है। इतना ही नहीं इस प्रकरण की जानकारी उच्चाधिकारियों से भी छिपाए जाने की बात कही जा रही है।

ख़बर है कि प्रकरण मीडिया ट्रायल में आने के बाद पुलिस एवं ज़िला प्रशासन के जिम्मेदारों के होश उड़ गए हैं। पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच बैठा दी है। इस मामले में पुलिस के कई जिम्मेदारों पर बड़ी कार्यवाही की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता हैं।

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