लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद नहीं सुधरती दिख रही गाँवो की तस्वीर कागजों पर दिखाई देता है विकास

 लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद नहीं सुधरती दिख रही गाँवो की तस्वीर कागजों पर दिखाई देता है विकास



बाँदा - उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जिस तरह से गांव के विकास की बात करते हैं और गांव को सुंदर बनाने की जहोजद में लगे हुए हैं वही उनके आला अधिकारी उनके सपनों में पानी फेरते नजर आ रहे हैं ऐसा ही एक गांव है जहां विकास के नाम पर लाखों रुपए निकाले गए लेकिन कागजों पर तो विकास दिखाया गया लेकिन जमीनी हकीकत की बात करें तो यहां सिर्फ कागजों में विकास दिखाया गया

आपको पता तो चले पूरा मामला जनपद बांदा से सटे तिंदवारी विधानसभा अंतर्गत सिंधन कला गांव का है जहां प्रधान और सचिव द्वारा विकास के नाम पर लाखों रुपए निकाले गए लेकिन विकास नहीं कराया गया ग्रामीणों की माने तो सिन्धन कला गांव में प्रधान व सचिव द्वारा कई लाख रुपए निकाले गए थे लेकिन जमीनी हकीकत पर कार्य नहीं हुआ जब हमारी टीम गांव के विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंची तू वहां ना तो स्ट्रीट लाइट मिली नाही कूड़ा रखने वाले कूड़ेदान मिले पुस्तकालय के नाम पर पुस्तकालय तो है लेकिन किताबें नहीं है गांव में बना सुलभ शौचालय कई दिनों से बंद पड़ा है साफ सफाई का किसी तरह का रखरखाव नहीं है रास्तों पर पानी और कीचड़ भरा है ग्रामीणों का सामना करना पड़ रहा है हाल ही में विद्युत की बात करें तो गांव में 8 से 10 घंटे ही बिजली उपलब्ध हो पाती है जिससे ग्रामीण अपने खेतों की सिंचाई करने में 4 दिन लग जाते हैं वही जब हमने ग्राम सभा के सदस्य दिलीप से बात की तो उन्होंने बताया की ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा कई लाखों रुपए निकालकर गमन कर लिया गया है और विकास के नाम पर गांव को ठेंगा दिखाया जा रहा है वहीं अगर रास्ते की बात करें तो वहां के राहगीरों ने बताया कि जब उन्होंने रास्ते के लिए प्रधान से बात की तो प्रधान का कहना है कि तुमने हमें वोट नहीं दिया है इसलिए हम यह रास्ता नहीं बनाएंगे वही जब हमने प्रधान से बात करना चाहा तो प्रधान ने इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी देने से मना कर दिया और ना ही मुलाकात की।