09 मार्च से 22 मार्च 2022 तक टीमें घर-घर जाकर ढूढ़ेगी टीबी के मरीज़

 09 मार्च से 22 मार्च 2022 तक टीमें घर-घर जाकर ढूढ़ेगी टीबी के मरीज़


रिपोर्ट-श्रीकान्त श्रीवास्तव


बाँदा - सक्रिय टीबी खोज अभियान 09 मार्च से 22 मार्च 2022 तक चलेगा जनपद में 09 मार्च से 22 मार्च तक सक्रिय टीबी खोज अभियान चल रहा है जिसके लिए जनपद में 160 टीमें गठित की गयी है। यह टीमें ऐसे क्षेत्रों में स्क्रीनिंग करेंगी जहां घनी आबादी, मलिन बस्तियाँ, दूरदराज के क्षेत्र, जेल, वृद्धाश्रम, ईंट का भट्ठा, एचआईवी संक्रमित लोग, गरीबी,


बेरोजगारी के साथ ही जागरूकता का भी अभाव हो। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डा0 अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रधानमंत्री जी की अपेक्षानुसार देश से टीबी को वर्ष 2025 तक मुक्त करने के उद्देश्य से 09 मार्च से 22 मार्च तक

"सक्रिय रोगी खोज अभियान (एसीएफ) चलाया जा रहा है। 09 मार्च से घर -घर जाने वाली टीमें अभियान में लगी हैं। इस अभियान के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर 160 टीमों

का गठन किया गया है। इनमें से 20 टीमें जनपद के शहरी क्षेत्र में तथा 05 टीमें अतर्रा व सभी आठ ब्लॉकों में काम करेंगी जिसमें अतर्रा में 15, बबेरू में 15, बडोखर खुर्द में 15

बिसंडा में 20 जसपुरा में 10, कमासिन में 15, नरैनी मैं 20, तिंदवारी में 15 एवं महुआ में 10 टीमें कार्यरत है। हर टीम में आशा, आंगनवाड़ी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। इन

टीमों के ऊपर 32 सुपरवाजर तथा 11 नोडल अधिकारी बनाए गए हैं जो इस पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए तैनात किए गए है। अभियान के दौरान टीम के हर सदस्य को रु. 150/- प्रतिदिन दिए जाएँगे जबकि टीबी की पुष्टि होने पर रु. 200 प्रति मरीज़ अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। 48 घंटे के अन्दर शुरू होगा इलाज, हर माह मिलेंगे 500 रूपये जिला क्षय रोग अधिकारी, डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि इस अभियान के लिए जनपद में 4 लाख जनसंख्या को कवर करना है, जिसके लिए एक टीम हर दिन 50 घरों का दौरा करेगी। अगर किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो टीम उस व्यक्ति की बलगम के नमूने एकत्र कर सुपरवाजर को देगी तथा सुपरवाजर नमूने को संबन्धित लैब में जाँच के लिए भेज देगी। यदि जांच में टीबी पायी जाती है तो उस व्यक्ति की इलाज 48 घंटे के अन्दर घर पर ही शुरू कर दिया जायेगा तथा व्यक्ति को निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज पूरा होने तक हर माह रु. 500/- दिये जाएंगे ताकि वह पौष्टिक आहार ले सके। यह राशि उनके खातों में सीधे ऑनलाइन प्रक्रिया से पहुंचेगी। इलाज लेने में असमर्थ लोगों के लिए फैमिली डॉट्स प्रोवाइडर की होगी सुविधा जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप वर्मा ने बताया कि डॉट्स प्रोवाइडर द्वारा डॉट्स सेंटर पर

मरीज़ों को टीबी की दवाई दी जाती है लेकिन जो लोग किसी कारण से इलाज लेने में असमर्थ हैं उनके परिवार वालों को ही फैमिली डॉट्स प्रोवाइडर बनाया जाएगा ताकि वे पूरा

इलाज करा सकें। डॉट्स प्रोवाइडर को केटेगरी 1 के केस में प्रति व्यक्ति इलाज के लिए रु. 1500/- जबकि एमडीआर के केस में रु. 5000/- दिए जाते हैं। ये हैं टीबी से सम्बंधित जनपद के आंकड़े क्षयरोग या ट्यूबरक्लोसिस टीबी एक गंभीर बीमारी है जो कि लम्बे समय से जन सामान्य की स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। यह एक संक्रामक रोग है जो मरीजों के खाँसने और थूकने से फैलता है। क्षय रोगियों की जल्द पहचान करके उनका इलाज शुरू करना, इस बीमारी को रोकने में मदद करता है। भारत में विश्व के सबसे ज्यादा टीबी के मरीज़ है। जिला प्रचार प्रसार कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि जनपद में वर्ष 2021 में जनवरी से दिसम्बर तक कुल 2500 टीबी के मरीज़ सरकारी में एवं प्राईवेट में 604 मीरज पाए गये जिनमें से 161 मरीज एम0डी0आर0 टी0बीके पाये गये जबकि वर्ष 2022 में जनवरी से आज तक 351 मरीज़ पाए गये हैं।