खिदमते खल्क फाउंडेशन के सामूहिक निकाह ,विवाह और शादी समारोह 32जोड़े हुए एक दूजे के

 खिदमते खल्क फाउंडेशन के सामूहिक निकाह ,विवाह और शादी समारोह 32जोड़े हुए एक दूजे के



परेड ग्राउंड में हुए समारोह में कानपुर की गंगा जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल हुई पेश 



कानपुर। हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनी 32 बेटियों की सामूहिक विवाह,शादी समारोह तन में सोलह श्रंगार और मन में अपने सपनो के राजकुमार के साथ ख़ुशगवार जिंदगी बिताने के हसरत के साथ मुस्लिम समाज की 27 दुल्हनों ने " कुबूल है " के शब्द के साथ निकाह की रस्म पूरी की तो हिन्दू धर्म की 5 दुल्हनों ने अपने जीवन साथी के साथ अग्नि के साथ फेरे लेकर वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया । परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में एक ही जगह पर हुए निकाह और विवाह में कानपुर की गंगा जमुनी सभ्यता का अनूठा मनज़र झलका । मौका था खिदमते खल्क फाउंडेशन द्वारा आयोजित सामूहिक निकाह और विवाह समारोह का । सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने इस आयोजन में वहां मौजूद हर किसी के मन में विवाहित जोड़ों के लिए दुआएं निकली । एक ही समय पर हुए निकाह और विवाह का नजारा हमारी सभ्यता और संस्कृति की मिसाल पेश कर रहा था । यहां 27 मुस्लिम जोड़ों का निकाह धर्मगुरुओं ने कराया । निकाह का खुतबा मुफ्ती मकसूद अहमद नदवी और कारी अनीस ने बयांन किया। विवाहित जोड़ों की जिंदगी खुशगवार हो इसके लिए मौलाना ने दुआ की तो विद्वान आचार्यो ने वैदिक मंत्रों के बीच विवाह की रस्में पूरी कराई।इस विवाह समारोह में नव विवाहित जोड़ो को आशीर्वाद, दुआ देने मशहूर समाजसेवी नज़म हमराज़, आर्यनगर विधायक अमिताभ वाजपेयी व कैन्ट विधायक मो हसन रूमी उपस्थित हुए सभी जोड़ो को शुभकामनाएं दी तथा संस्था द्वारा भव्य आयोजन की प्रसंशा की। कमेटी के सभी पदाधिकारियो ने इन्तिज़ाम इतना भव्य किया जैसे उनकी अपनी बेटियों की शादी हो थे। पंडाल का नजारा कहीं खुशी कहीं गम का नजर आया । किसी दुल्हन के मां बाप बेटी दूर होने की ममता में खोए हुए थे तो कोई दुनिया की सबसे बड़ी खुशी बेटी कि शादी होने के आनंद को महसूस कर रहा था । शायद हर मां बाप का अरमान यही होता है कि उसकी बेटी की शादी अच्छे परिवार में शादी हो , लेकिन कई बार यह ख्वाब दहेज रूपी दानव का शिकार हो जाता है । लेकिन आज ना तो पैसे की दिक्कत आ रही थी और ना ही दहेज देने का कोई दबाव था । क्योंकि खिदमते  खल्क फाउंडेशन की कोशिश से सारी परेशानियां दूर हो गई थी । बड़े बड़े तामझाम और दहेज के बोझ को सहने में अक्षम और निर्भरता शब्द के अर्थ आज पूरी तरह बदल से गए थे । संस्था ने सभी जोड़ो को गृहस्थी में काम आने वाले सभी सामान उपहार के तौर पर दिए । जिसमे फ्रिज , अलमारी , बेड, कुर्सी , मेज , बक्सा,सभी प्रकार के बर्तन और जवैलरी भी शामिल है । निकाह और शादियों के बाद विदाई समारोह के दौरान दुल्हनों के परिजनों के आंसू निकले तो संस्था के जिम्मेदार भी खुद को न रोक सके और उनकी भी आंखें नम हो गई । उन्होंने बखूबी भाई और बाप के फर्ज को अदा किया । संस्था के अध्यक्ष हाजी नफीस अहमद उर्फ बबलू अरबिया ने कहा कि दहेज के कारण लोगो को बेटियां बोझ लगने लगती है और यही वजह है कि कुछ माँ बाप बेटे बेटियों में भेदभाव भी करते है , जो गलत है । अगर सभी बेटियों की शादी बिना दहेज़ के हो जाए तो मां बाप को बेटियां बोझ नहीं लगेगी । उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मुल्क़ की सबसे बड़ी परेशानी औरत  की आदमी के मुकाबले हो रही कम दर का भी सबसे अच्छा यही उपाय है सामूहिक विवाह । इससे मां बाप को बेटियां बोझ नहीं लगेगी और लोग बेटे बेटियों में भेदभाव नहीं करेंगे । कुछ लोग देश को बांटने में लगे है , ऐसे में संस्था ने सांप्रदायिक सौहार्द को कायम रखने के मकसद से निकाह और विवाह एक ही स्थान पर कराई हैं । उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रकार के आयोजन से सामाजिक सौहार्द की इस मुहिम को गति मिलेगी ।इस साल मशहूर समाजसेवी स्वर्गीय अब्दुल माबूद जो संस्था के महामंत्री थे और मशहूर नेत्र विशेषज्ञ स्वर्गीय डॉ महमूद रहमानी को समर्पित इस आयोजन में दोनों के लिए दुआएं मगफिरत की गई । कहा गया कि इस आयोजन की शुरुआत कराने में इन दोनों हस्तियों का बड़ा ही योगदान था । कार्यक्रम मे मुख्य रूप से फैयाज़ खान, हाशिम रिज़वी,नदीम अहमद(इरम),शारिक इश्तियाक एडo,शमीम अहमद, शिम्मा,आमिर केटरिंग, सलीम खान,हाजी सरताज, नदीम टिंबर, मुशरान् माबूद, मोइन राइनी, पप्पू कोट,सुनील साहू,अंसार अली, शोईब् फारूखी,,रेनु बद्रे तबिश् इकबाल  रहे,कार्यक्रम का संचालन इंतिखाब आलम काज़मी ने किया ।और दुवा, कारी अनीस साहब ने कराई।