जैव हथियारों पर रूस और अमेरिका आमने-सामने, चीन भी कूदा विवाद में

 जैव हथियारों पर रूस और अमेरिका आमने-सामने, चीन भी कूदा विवाद में



न्यूज़।बीते दिनों ही डब्ल्यूएचओ ने यूक्रेन से इस प्रकार के किसी भी खतरनाक पैथोजेन को नष्ट करने का आग्रह किया है ताकि रूसी हमले में किसी पैथोजन के लीक हो जाने से महामारी फैलने का खतरा न रहे।यूक्रेन पर रूस ने जैव हथियार यानी बायोलाजिकल वेपन विकसित करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला इतना अहम है कि इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा भी हुई। आधुनिक होते युद्ध संसार में जैव हथियारों को खासा खतरनाक माना जाता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या वाकई यूक्रेन में जैव प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं और क्या इसके पीछे अमेरिका का हाथ है:

इस तरह सामने आया दावा


रूस के विदेश मंत्रालय ने गत रविवार को एक ट्वीट में आरोप लगाया था कि अमेरिका और यूक्रेन मिलकर यूक्रेन की धरती पर सैन्य उद्देश्यों के लिए जैव प्रयोगशालाएं संचालित कर रहे हैं।

रूस ने दावा किया था कि उसके हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज आए हैं जो साबित करते हैं कि वहां खतरनाक जैव हथियारों के लिए काम चल रहा था और इन लैब से सबूत मिटाने के लिए आपात अभियान भी चलाने की बात सामने आई है।

.रूस ने ऐसे दस्तावेज मिलने का दावा भी किया जिससे यूक्रेन के खार्कीव और पोल्टावा शहरों में जैव प्रयोगशाला में हथियार बनाने के अभियान को अमेरिका के समर्थन की बात साबित होती है।

रूस के इन आरोपों पर चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूसी दावे का समर्थन किया।

यही नहीं, ट्विटर पर भी इस मामले को लेकर एक हैशटैग यूएसबायोलैब्स के नाम से शुरू हो गया और अमेरिका के दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों व संस्थाओं के बीच भी इस विचार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वह अमेरिकी प्रशासन को इसमें मामले में घेरने का प्रयास कर रहे हैं।

आरोपों से अमेरिका ने किया इन्कार

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थामस ने साफ कहा कि यूक्रेन के पास कोई जैव हथियार कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने रूस पर ही आरोप लगा दिया कि वह इस मामले को उठाकर यूक्रेन के खिलाफ खुद जैव हथियारों का प्रयोग करना चाहता है। अमेरिका की राजदूत लिंडा थामस ने कहा कि रूस ने लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध जैव हथियार विकसित किए हैं।

तटस्थ संस्थाओं का यह है कहना

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि उसे यूक्रेन द्वारा जैव हथियारों पर प्रतिबंध समेत किसी अंतरराष्ट्रीय संधि के उल्लंघन की जानकारी नहीं है।

निरस्त्रीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र के आयुक्त इजुमी नाकामित्सु ने भी पुष्टि की कि यूक्रेन में जैव हथियार होने की जानकारी संयुक्त राष्ट्र को नहीं है। उन्होंने इस संबंध में जैव हथियारों पर रोक लगाने वाले 1975 से जारी प्रविधान का भी उल्लेख किया।

अहम सवाल: जैव प्रयोगशालाएं हैं या नहीं

बड़ा सवाल यही है कि यूक्रेन में जैव प्रयोगशालाएं हैं या नहीं। जवाब है, हां हैं। यूक्रेन ऐसी जैव प्रयोगशालाओं का संचालन करता है जिसके लिए अमेरिका से वित्तपोषण होता है।

अमेरिका की गृह उपमंत्री विक्टोरिया नुलैंड ने इस संबंध में तथ्यों की अमेरिकी सीनेट में इसी सप्ताह पुष्टि की है।

सीनेट में रिपब्लिकन सांसद मार्को रुबियो ने सवाल किया था कि क्या यूक्रेन के पास जैव हथियार हैं। हालांकि नुलैंड ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि यूक्रेन में जैव अनुसंधान प्रयोगशालाएं हैं।

ऐसे हुई जैव प्रयोगशालाओं की शुरुआत


सोवियत संघ के विघटन के बाद इसके पूर्व सदस्यों व अन्य देशों में स्वास्थ्य सेवा के लिए अमेरिकी मदद से जैव प्रयोगशालाएं चलाई गईं।

इनका उद्देश्य जैव हथियार बनाने के बजाय विज्ञान का प्रयोग कर उस क्षेत्र के देशों में बीमारियों को दूर करने और स्वास्थ्य बेहतर करने के काम पर था।

बेहद खतरनाक है मामला


यदि यूक्रेन के पास जैव हथियार नहीं भी हैं, तब भी यह मामला खासा खतरनाक है। रूस अपने जैव हथियारों से यूक्रेन पर हमला कर सकता है।

अमेरिकी गृह विभाग का आकलन है कि रूस ऐसे हथियारों का प्रयोग करता रहा है।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जान साकी ने बीते दिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जैव हथियारों के प्रयोग का आरोप भी लगाया था।

इसमें रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नेवलेनी को जहर देने और सीरिया में इन हथियारों के प्रयोग की बात थी।

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