फ़तेहपुर में कोरोना के बाद अब मंकी पाक्स का खतरा बढ़ा, अलर्ट जारी

 फ़तेहपुर में कोरोना के बाद अब मंकी पाक्स का खतरा बढ़ा, अलर्ट जारी



फ़तेहपुर । कोरोना महामारी के बाद अब मंकी पॉक्स का खतरा बढ़ गया है। इसको लेकर फ़तेहपुर के सीएमओ ने मंगलवार को जिले के सभी अस्पतालों में अलर्ट जारी किया है। साथ ही जरूरी एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। मंकी पाक्स के लक्षण मिलने वाले मरीजों को अलग वार्ड में भर्ती करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सीएमओ डा. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि अभी कोरोना के बाद मंकी पाक्स वायरस ने जन्म लिया है। हालांकि, अभी कोई भी मरीज सामने नहीं आया है लेकिन अस्पतालों को सजगता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।


विदेशों से आने वालों पर रखें नज़र


स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में विदेशों से आने वाले लोगों पर नजर रखने को कहा है। विदेशों से आने वालों में मंकी पॉक्स की बीमारी का कोई लक्षण है तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देनी होगी। सीएमओ ने अस्पताल में अलग से आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का भी निर्देश दिया है। विभाग ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति में रोग की पुष्टि हो तो तुरंत उसकी सूचना दें।


लक्षण दिखाई दें तो तत्काल करें सूचित


स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्टाफ को अलर्ट किया है। विदेशों में केस सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर किसी में भी मंकी पॉक्स के लक्षण सामने आएं तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दें।अगर आसपास भी किसी को शरीर में दाने, गांठें या अन्य लक्षण नजर आएं तो तत्काल सूचित करें।


क्या है मंकी पॉक्स वायरस


मंकी पॉक्स वायरस मुख्य रूप से चूहे और बंदरों जैसे जानवरों से फैलता है। जानवरों से होकर इंसानों में यह वायरस तेजी से फैलता है। यह बीमारी संक्रमित मरीज के संपर्क में आने, उसके उपयोग की वस्तुओं को छूने और संक्रमित जानवर से इंसानों में फैलती है।


बीमारी के लक्षण


– बुखार, सिर और कमर में दर्द।

– शरीर पर सूजन, थकान।

– मांसपेशियों में दर्द होना।

– खुजली वाले दाने निकलना।


लक्षण मिलने पर पुणे लैब भेजा जाएगा नमूना


सीएमओ के मुताबिक, मंकी पाक्स नामक वायरस से व्यक्ति को पहले बुखार आता है उसके बाद शरीर में चक्कते पड़ने लगते हैं लिम्फनोड़ जैसे लक्षण मिलते हैं। जो दो से चार सप्ताह तक रहता है। यह वायरस आंख, नाक, मुंह के जरिए शरीर में दाखिल होता है। इसके अलावा संक्रमित जानवरों के काटने पर भी यह संक्रमण हो सकता है। अगर किसी भी मरीज में इस तरह का कोई लक्षण पाया जाता है तो उसके नमूने को पूणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट वायरोलाजी लैब में भेजा जाएगा।