विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशन में जिला कारागार में विधिक जागरुकता शिविर एवं जेल का निरीक्षण किया गया

 विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशन में जिला कारागार में विधिक जागरुकता शिविर एवं जेल का निरीक्षण किया गया 



फतेहपुर।जिला विधिक सेवा प्रधिकरण सचिव पूर्ण कालिक श्रीमती अनुराधा शुक्ला ने बताया कि राजेन्द्र सिंह चतुर्थ प्रभारी जनपद न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशन में कोविङ -19 के सम्बन्ध में जारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुये जिला कारागार में विधिक जागरुकता शिविर एवं जेल निरीक्षण किया गया ।

उपरोक्त जागरुकता शिविर एवं जेल निरीक्षण में श्रीमती अनुराधा शुक्ला सचिव ( पूर्ण कालिक ) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व जेल अधीक्षक मो०अकरम खान, जेलर  संजय चन्द्र, अंजनी कुमार डिप्टी जेलर आदि उपस्थित रहे ।

 किशोर बन्दी बैरक नम्बर 3 बी का निरीक्षण किया गया जहाँ कुल 28 किशोर बन्दी निरूद्ध थे किशोर बन्दियों से उनके स्वास्थ्य, खाना-पानी दवाई आदि के बारे में जानकारी ली गयी, इसके अतिरिक्त सभी बन्दियों से जानकारी ली गयी कि उनके पास अधिवक्ता है अथवा नहीं एवं यह निर्देश दिया गया कि यदि किसी के पास अधिवक्ता नहीं है तो प्रार्थना पत्र प्रेषित करके कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते है । 

इसके उपरान्त समस्त बैरक राइटरों से उनके बैरक में निःशुल्क अधिवक्ताओं की जानकारी ली गयी एवं उनसे पूछा गया कि उनके पास निःशुल्क अधिवक्ता है या नहीं । वर्तमान माह अप्रैल में 06 प्रार्थना पत्र हुए जिसमें सभी का निस्तारण होना पाया गया । जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि सभी बन्दियों को नियमित योगा कराये। इस सम्बन्ध में पूर्व में भी निर्देश दिया जा चुका था । पिछले वर्ष विश्व योगा दिवस पर बन्दियों की छोटी सी वीडियो को ऑनलाइन अपलोड किया एवं जिला कारागार द्व द्वारा अपना प्रतिभाग किया गया। शिविर में पुरुष बंदियों की समस्याओं को सुनी गयी और जिन बंदियों के पास अधिवक्ता नहीं है उन बंदियों को निःशुल्क अधिवक्ता हेतु बंदियों को जानकारी दी गयी कि यदि किसी भी बंदी को निःशुल्क अधिवक्ता की आवश्यकता है तो यह बंदी प्रार्थना पत्र के माध्यम से जेल अधीक्षक से अग्रसारित कराकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में प्रेषित कर सकते है । 

14 मई 2022 को आयोजित होने वाली लोक अदालत में बैंक वसूली वाद, किरायेदारी वाद, मोबाइल फोन व केबल नेटवर्क संबंधी प्रकरण, आयकर, बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाओं से सम्बन्धित प्रकरण, ऐसे प्रकरण जिनमें पक्षकार पारस्परिक सद्भावना हेतु आपसी सुलह समझौते से निपटाना चाहे दीवानी वाद, उत्तराधिकार वाद, पारिवारिक वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, चेक बाउन्स के मामले, जनोपयोगी सेवाओं तथा वाणिज्य कर से सम्बन्धित प्रकरण राजस्व / चकबन्दी / श्रम वाद, मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित चालानी वाद शमनीय प्रकृति के किमिनल वाद का निस्तारण के बारे में जानकारी दी गयी । 

जेल अधीक्षक को निर्देशित किया जाता है कि यदि किसी बंदी को कोई विधिक समस्या हो तो प्रार्थना पत्र के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में प्रेषित करना सुनिश्चित करे ।