आषाढ़ में जेठ जैसी गर्मी, किसानों की चिंता बढ़ी

 आषाढ़ में जेठ जैसी गर्मी, किसानों की चिंता बढ़ी           



फतेहपुर। झमाझम बारिश वाले आषाढ़ महीने में ज्येष्ठ सी तेज धूप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून की दस्तक के साथ अन्नदाताओं में अच्छी बारिश की उम्मीद जगी थी। पिछले कुछ दिनों से मौसम की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।धान की नर्सरी पीली पड़ रही है। दूसरी फसलें भी सूखने लगी हैं। हालत यह है कि खेतों की मिट्टी तक रूखी हो गई है। किसानों का मानना है कि यदि बारिश में अब और देरी हुई तो धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है।जिले में सर्वाधिक क्षेत्रफल धान की फसल का है। कृषि विभाग ने 83 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा था। इसमें अभी तक मात्र 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही रोपाई हो सकी है।

पिछले साल 10 जुलाई तक 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई हो गई थी। जून की औसत बारिश 70 मिलीमीटर के सापेक्ष 35 मिलीमीटर हुई। जुलाई में हालत और भी खराब हो जाने से खरीफ की बुआई पूरी तरह से रुक गई। आसमान पर बादल आते हैं और चले जाते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव के मौसम विशेषज्ञ वसीम खान ने बताया कि फिलहाल दो दिन के बाद छिटपुट बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 15 जुलाई को मानसून फिर से सक्रिय होगा। तब मौसम में बदलाव आएगा। जिन किसानों ने अभी धान की रोपाई नहीं की है, वे तैयारी पूरी कर लें। बारिश होते ही धान की रोपाई शुरू कर दें।

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