जान की परवाह किये बिना मरीजों की सेवा में जुटी हैं एएनएम वंदना

 जान की परवाह किये बिना मरीजों की सेवा में जुटी हैं एएनएम वंदना


 


नदी पार करके डेढ किलोमीटर पैदल पहुंचती हैं गांव 


एक वर्ष का बच्चा होने के बाद भी निभा रही पूरी जिम्मेदारी 


फतेहपुर। अरे दादा रूकिये जरा मुझे भी अपनी नाव में बैठा कर कुकेडी गांव पहुंचा दीजिये। कोविड वैक्सीनेशन और परिवार नियोजन से संबंधित डाटा एकत्र करना है। जी हां यह नजारा है अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाफरगंज में तैनात एएनएम वंदना विश्वकर्मा के यमुना नदी से जुडी मदुरैन नदी पार करके गांव में डयूटी करने का। एएनएम का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से नदी पार करके कुकेडी समेत आधा दर्जन गांवों में जाकर डयूटी करना अन्य कर्मचारियों के लिये किसी प्रेरणा से कम नहीं है। यही नहीं वंदना  का एक वर्ष का बच्चा होने के बाद भी काम के प्रति यह समर्पण भाव हर किसी को आश्चर्यचकित करता है।  

एएनएम वंदना विश्वकर्मा हमीरपुर निवासी हैं। करीब चार वर्षों से फतेहपुर जनपद में तैनात है। पहली तैनाती जोनिहा स्वास्थ्य केंद्र में मिली। इसके बाद जाफरगंज अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात होकर लोगों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ दे रही हैं। आजकल यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। यमुना नदी से जुड़ी मदुरैन नदी भी लबालब है। एएनएम नदी को पार करके कुकेडी, गजईपुर, मेवातगंज, बंगलाडेरा, धौरहरा आदि गांवों में टीकाकरण, परिवार नियोजन प्रोग्राम, टीबी प्रोग्राम, आयुष्मान भारत आदि के लिए जाती है। एएनएम ने बताया कि डयूटी के लिए सप्ताह में 3-4 दिन नदी पार करके गांवों में जाना पड़ता है। कुकेडी गांव के रहने वाले दिनेश, गजईपुर की संगीता ने बताया कि एएनएम गांव आती हैं। स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देती है और हर व्यक्ति से बहुत ही अच्छा ब्यवहार करती हैं। कोविड के दौरान भी वैक्सीनेशन कार्य पूरे लगन के साथ किया।

सीएमओ डा0 सुनील भारतीय ने कहा कि एएनएम के बेहतर कार्य के बारे में जानकारी मिली है। जल्द ही उन्हे सम्मानित किया जायेगा। अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी एएनएम से प्रेरणा लेनी चाहिये। 


इनसेट --

सूझबूझ और तत्परता से बचाई जच्चा व बच्चा की जान 


फतेहपुर। करीब एक वर्ष पहले एएनएम वंदना विश्वकर्मा ने अपनी सूझबूझ से एक गर्भवती व उसके बच्चे की जान बचाई थी। एएनएम ने बताया कि नेवातगंज की रहने वाली गर्भवती महिला सुरैया चार महीने की गर्भवती थी लेकिन उसका हीमोग्लोबिन चार प्रतिशत था। सुरैया का पति मार्ग दुघर्टना में घायल होने से कहीं आने जाने में लाचार था। ऐसे में सुरैया को स्वास्थ्य केंद्र जाफरगंज लेकर गये और उसकी जांच कराकर दवायें व सीरप दिया। साथ ही सुरैया की हर महीने नियमित जांच कराई गई और पोषण युक्त आहार लेने से डिलीवरी के समय हीमोग्लोबिन दस प्रतिशत हो गया। जाफरगंज स्वास्थ्य केंद्र में नार्मल डिलीवरी के बाद सुरैया ने बच्चे को जन्म दिया और अब जच्चा बच्चा दोनो स्वस्थ है।

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