परमात्मा पर अटल विश्वास ही भक्ति का लक्षण

 परमात्मा पर अटल विश्वास ही भक्ति का लक्षण



श्रीमद् भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन जुटी भक्तों की भारी भीड


राजा मनु ,ध्रुव चरित्र सुन भक्त हुए भाव विभोर


बिदकी फतेहपुर ।जनपद के जहानाबाद विधानसभा के  देवमई ब्लॉक के रसूलपुर पधारा गांव में नारायणी माता मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ में तीसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटी।

कथा व्यास पंडित राजेश अवस्थी ने मन प्रसंग से लेकर ध्रुव चरित्र की कथा का बखान किया। परमात्मा पर अटल विश्वास ही भक्ति का लक्षण है। सृष्टि क्रम का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि राजा मनु ही मन का प्रतीक है। सतरूपा ही सदभावना है।बेटी देवहुति ही श्रद्वा है। आचार्य कर्दम संयम के प्रतीक हैं। जब जीव का मन श्रद्वा और संयम से परिपूर्ण हो जाये तब भक्ति का जन्म होता है।

उन्होने शिव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि विवाह शब्द का अर्थ अपने भटके हुए मन को एक खूटे में बांधना है। आचार्य  ने कहा कि विवाह भोग का साधन नही, विवाह योग का साधन है। ध्रुव चरित्र की कथा कहते हुए आचार्य ने कहा कि 5 वर्ष के ध्रुव ने भगवान को प्राप्त कर लिया। जब भक्त की सच्ची उत्कंठा भगवान से मिलने की होती है तो सच्चे सद्गुरू घर बैठे मिल जाते हैं।जैसे देवर्षि नारद को ध्रुव मिले, हनुमान को विभीषण मिले। भक्त की सच्ची लगन ही भगवान से मिलने का साधन  है। कथा सुन भक्त भावविभोर हो गये। कथा परीक्षित जयराम सिंह तोमर ने शाम को आरती किया। करण किया गया।

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