भीमराव अंबेडकर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उर्दू दिवस के अवसर पर उर्दू जबान की जरूरत और अहमियत विषय पर एक संगोष्ठी और विभिन्न प्रतियोगिताओं का किया गया आयोजन

 भीमराव अंबेडकर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उर्दू दिवस के अवसर पर उर्दू जबान की जरूरत और अहमियत विषय पर एक संगोष्ठी और विभिन्न प्रतियोगिताओं का किया गया आयोजन



फतेहपुर।भीमराव अम्बेडकर राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. अपर्णा मिश्रा के संरक्षण में उर्दू विभाग द्वारा "उर्दू दिवस" के अवसर पर "उर्दू ज़बान की ज़रूरत और अहिमयत" विषय पर एक संगोष्ठी और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बीए प्रथम वर्ष नशरा रिज़वान ने पहली,बीए तृतीय वर्ष सबा  बानो नै दूसरी और बीए तृतीय वर्ष वरदा रियाज़ ने तीसरी पोजीशन हासिल की, पोस्टर प्रतियोगिता में रुकैया नाज़ ने पहली एक बार फिर से सबा बानो ने दूसरा और वर्दा रियाज़ ने तीसरा स्थान हासिल किया। निबंध लेखन में बीए तृतीय वर्ष मरियम ने प्रथम, बीए द्वितीय वर्ष शगुफ्ता और बीए तृतीय वर्ष बुशरा फरहीन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 

छात्रों की हौसला अफज़ाई करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. अपर्णा मिश्रा,मुख्य अथिति जनाब क़मर सिद्दीकी और विशिष्ट अथिति डॉ. मुहम्मद शाहिद खान ने छात्राओं को पुरस्कृत किया।

 जीआईसी शिक्षक और  शायर डॉ मुहम्मद शाहिद खान ने उर्दू के महत्व और उपयोगिता पर प्रकाश डाला और उन्होंने अपनी एक नज़्म भी सुनाई। माननीय अतिथि जनाब कमर सिद्दीकी ने उर्दू भाषा की बुनियादी संरचना और सिद्धांतों पर चर्चा की और कहा कि बच्चों और शिक्षकों को हमेशा उर्दू के प्रचार और विकास के लिए प्रयास करना चाहिए। हमें घर में उर्दू का माहौल बनाना चाहिए। कहा कि आप ज़्यादा से ज़्यादा उर्दू शब्दों का प्रयोग करें आप नियमित रूप से उर्दू अखबार पढ़ें । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ.अपर्णा मिश्रा ने कहा, "उर्दू भाषा बहुत प्यारी भाषा है। इस तरह के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम छात्रों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देते हैं। इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। 

उक्त कार्यक्रम का संचालन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. जिया तसनीम  ने कहा कि"उर्दू और हिंदी परस्पर जुड़े हुए हैं। कुछ भाषाविद उर्दू और हिंदी को एक ही ज़बान मानते हैं। उर्दू मेल मिलाप की ज़बान है," जूलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डॉ. गुलशन सक्सेना, डॉ. शकुंतला, डॉ. प्रशांत द्विवेदी , डॉ. उत्तम कुमार शुक्ला, डॉ. रेखा वर्मा, डॉ. लक्ष्मीना भारती, डॉ. रमेश सिंह, डॉ. शरद चंद्र रॉय, डॉ. चारुमाशरा, डॉ. अजय कुमार, डॉ. ज्योति कुमारी अशोक कश्यप,और सुश्री संजीदा उपस्थित रहीं।

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