जिम्मेदारों की लापरवाही से कमासिन में पेयजल का संकट

 जिम्मेदारों की लापरवाही से कमासिन में पेयजल का संकट




बांदा : कमासिन जल संस्थान की लापरवाही के नतीजे में कस्बे में  सप्ताह भर से पानी की सप्लाई नहीं हुई। नतीजे में रात भर टंकी भरने के बजाय कर्मचारी खेतों की सिंचाई करते हैं। समूचे टंकी परिसर में लबालब पानी भरा हुआ है। आरोप है कि जलकल कर्मचारी ड्यूटी से विरत रहकर कस्बे में नियमित पानी की सप्लाई नहीं देते हैं।

कस्बे में 1971 में स्थापित जलकल विभाग द्वारा जल संस्थान के माध्यम से पीने के पानी की सप्लाई के लिए पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। तब से आज तक इसी टंकी के सहारे कस्बे में पेयजल की सप्लाई होती है। पांच दशक से ज्यादा समय से पानी की सप्लाई का सिलसिला बेहतर था। लेकिन इस वक्त जलकल विभाग में तैनात कर्मचारीयों की घोर लापरवाही के कारण कस्बे वासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं। बबलू तिवारी ने बताया कि टंकी घर में तैनात कर्मचारी सत्येंद्र कुमार सिंह रात भर टंकी घर के आसपास खेतों की सिंचाई करते हैं। जो भी ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई होती है उस पानी को खेतों तक पहुंचाया जाता है। टंकी में पानी लोड नहीं किया जाता। यही वजह है कि टंकी परिसर में लबालब पानी भरा हुआ है। कस्बे में लगभग एक सप्ताह से ज्यादा समय से घरों में लगे नलों से एक बूंद पानी नहीं टपका है। भरत यादव का आरोप है कि टंकी घर में तैनात सत्येंद्र बेहद लापरवाह है वह दिन भर चौराहों में बैठकर आवारगी करते हुए ड्यूटी नहीं करता है। बताया कि सत्येंद्र का ट्रांसफर मुख्यालय बांदा के लिए हों चुका है।लगभग एक माह होने के बाद भी सत्येंद्र ने मुख्यालय ज्वाइन नहीं किया। बल्कि टंकी घर में डेरा जमाए हुए हैं। इन दिनों कस्बे में पानी को लेकर हाय तौबा मचा हुआ है। नल उपभोक्ता राजीव तिवारी ने बताया किअवर अभियंता जल संस्थान से शिकायत के फोन करने पर कभी फोन नहीं उठाते न ही यहां की समस्याओं से रूबरू होते हैं। तिवारी ने बताया कि सत्येंद्र सिंह लाखों रुपए का घालमेल किए हुए हैं। इधर जलकल बाबू सत्येंद्र सिंह यादव का कहना है कि टंकी परिसर में लीकेज होने की वजह से पानी भरा हुआ है। कस्बे वासियों ने जिला महाप्रबंधक जल संस्थान से मांग की है कि सत्येंद्र सिंह यादव जल बाबू को तत्काल कार्यमुक्त कराते हुए मुख्यालय में  तैनात किया जाए।

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