कारागार, बांदा में महिला जेल बन्दियों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाये जाने हेतु विधिक जागरुकता शिविर का हुआ आयोजन

 कारागार, बांदा में महिला जेल बन्दियों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाये जाने हेतु विधिक जागरुकता शिविर का हुआ आयोजन


श्रीकांत श्रीवास्तव ब्यूरो बाँदा


बांदा ।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण-नई दिल्ली, उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं जिला जज / अध्यक्षा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा श्रीमती कमलेश कच्छल के निर्देशन में  जिला कारागार, बांदा में महिला जेल बन्दियों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाये जाने

हेतु महिला बैरक में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन श्रीमती सुचेता चौरसिया, सचिव-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा की अध्यक्षता में किया गया। सर्वप्रथम श्रीमती सुचेता चौरसिया, सचिव-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा


बताया गया कि भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में महिलाएं व बालिकाएं वर्तमान समय में पिछले दस सालों की अपेक्षा बेहतर स्थिति में आत्मनिर्भर है। सरकारी संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को आत्मसुरक्षा हेतु एवं अन्य महिलाओं व बालिकाओं को आत्मसुरक्षा प्रदान करने हेतु सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाएं भी चलायी जा रही है। महिलाओं व बालिकाओं को आत्मबल प्रदान किये जाने हेतु गैर सरकारी संगठनो द्वारा तकनीकी गुणों से सुसज्जित कक्षाएं भी चलायी जा रही है।

महिला सशक्तिकरण से अभिप्राय है कि महिलाओं में वह क्षमता विकसित हो जिससे वह अपने निर्णय स्वयं ले सके। इसी क्रम में जेल में निरुद्ध महिलाओं हेतु कारागार में सम्बद्ध महिला पराविधिक स्वयं सेवक श्रीमती सुमन शुक्ला द्वारा ब्युटिशियन के माध्यम से महिला बन्दियों को ब्युटी पार्लर का प्रशिक्षण, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तनिर्मित पंखे, थैले व अन्य सजावटी समानों

को बनाने का प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है जिससे कि महिला बन्दी सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सके तथा जेल से बाहर जाकर उन्हें अपनी जीविका चलाने में कठिनाइयों का सामना न

करना पड़े। सुमन शुक्ला, पराविधिक स्वयं सेवक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा द्वारा बताया कि महिलाओं से सम्बन्धित विभिन्न सरकारी योजनाओं के बल पर एवं स्वयं सहायता

समूह के द्वारा महिलाएं आत्मनिर्भर होकर सशक्त हो सकती है। साथ ही यह भी बताया कि महिलाओं के कुपोषण को दूर करने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलायी जा रही है जिससे

महिलाएं शारीरिक रूप से सशक्त हो सके। उन्होने वृद्धावस्था पेंशन और निराश्रित महिलाओं को पेंशन प्रदान किये जाने सम्बंधी योजनाओं से भी अवगत कराया। यह भी बताया कि महिला हेल्प लाइन नं०-181 (वनस्टॉप सेण्टर) के जरिये सुरक्षा प्रदान करने के प्राविधानों का विस्तार से वर्णन किया। अनुराग तिवारी, सहायक अधिवक्ता लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल-बांदा ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए आत्मचिंतन एवं स्व निर्णय की शक्ति होना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होने बताया कि महिलाओं को उन नकारात्मक स्थितियों से बचना चाहिए जो उनके सशक्त होने में बाधक है। तहसीलदार महोदय द्वारा महिलाओं व बालिकाओं के आत्मनिर्भर बनाने हेतु शिविर में उपस्थित महिलाओं को सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं से भी अवगत कराया। शिविर के अन्त में अविनाश गौतम, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, करागार-बांदा द्वारा सभी आये हुए आगन्तुको का आभार व्यक्त किया गया। शिविर में जेलर वीरेन्द्र कुमार वर्मा, उपजेलर, महेन्द्र सिंह, राशिद अहमद-डी.ई.ओ. अशोक त्रिपाठी, पराविधिक स्वयं सेवक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बांदा व समस्त महिला जेल बन्दी उपस्थित रही।

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