महाअष्टमी पर आज करें महागौरी की उपासना, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि*ब्यूरो रिपोर्ट अजय प्रताप* आज नवरात्रि का आठवां दिन है. इसे महाअष्टमी भी कहा जाता है. आज के दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि मां महागौरी पापों का नाश करती हैं और भक्तों को इससे मुक्ति दिलाती हैं. महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है.।आज चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है. चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना की जाती है. इस दिन लोग विशेष उपवास रखते हैं. इस दिन, कन्या पूजन भी किया जाता है. भगवान शिव की प्राप्ति के लिए मां महागौरी ने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. जब भगवान शिव ने इनको दर्शन दिया तब उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गौर हो गया और इनका नाम गौरी हो गया. माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए इन्ही की पूजा की थी. मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत रंग मैं इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है. विवाह सम्बन्धी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है. ज्योतिष में इनका सम्बन्ध शुक्र नामक ग्रह से माना जाता है.क्या है मां गौरी की पूजा विधि? पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरम्भ करें. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें. उसके बाद इनके मंत्रों का जाप करें. अगर पूजा मध्य रात्रि मैं की जाए तो इसके परिणाम ज्यादा शुभ होंगे.

महाअष्टमी पर आज करें महागौरी की उपासना, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि


*ब्यूरो रिपोर्ट अजय प्रताप*

आज नवरात्रि का आठवां दिन है. इसे महाअष्टमी भी कहा जाता है. आज के दिन दुर्गा मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि मां महागौरी पापों का नाश करती हैं और भक्तों को इससे मुक्ति दिलाती हैं. महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है.।आज चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है. चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना की जाती है. इस दिन लोग विशेष उपवास रखते हैं. इस दिन, कन्या पूजन भी किया जाता है.

भगवान शिव की प्राप्ति के लिए मां महागौरी ने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. जब भगवान शिव ने इनको दर्शन दिया तब उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गौर हो गया और इनका नाम गौरी हो गया. माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए इन्ही की पूजा की थी. मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत रंग मैं इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है. विवाह सम्बन्धी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है. ज्योतिष में इनका सम्बन्ध शुक्र नामक ग्रह से माना जाता है.

क्या है मां गौरी की पूजा विधि?

पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरम्भ करें. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें. उसके बाद इनके मंत्रों का जाप करें. अगर पूजा मध्य रात्रि मैं की जाए तो इसके परिणाम ज्यादा शुभ होंगे. 

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