असोथर में विद्युत आपूर्ति चरमराई, पिछड रही धान की रोपाई,किसान,ब्यापारी अंदोलित
असोथर में विद्युत आपूर्ति चरमराई, पिछड रही धान की रोपाई,किसान,ब्यापारी अंदोलित

असोथर/फतेहपुर।एक माह पहले से,सैकड़ों गांवों के हजरो उपभोक्ताओं के सामने बिजली का संकट, खड़ा हो गया है धान की रोपाई तक प्रभावित
एक ओर जहां सरकार 24 घंटे बिजली देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर असोथर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े ग्रामीण उपभोक्ता बिजली संकट से जूझ रहे हैं। बीते एक माह से इस उपकेंद्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। रोजाना कई बार ट्रिपिंग, घंटों की रोस्टिंग और अघोषित बिजली कटौती से न केवल आमजन परेशान हैं, बल्कि किसानों की धान की रोपाई भी पिछड रही है और कल कारखाने बंदी के कगार पर है असोथर विद्युत उपकेंद्र से नरैनी, असोथर, थरियांव, गाजीपुर, घरवासीपुर और जरौली सहित छह फीडर संचालित  हैं। इन फीडरों के अंतर्गत आने वाले गांवों — जैसे बेसड़ी, रामनगर कौहन, जमलामऊ, सरकंडी, पुर, सातों, गेंडुरीं, टीकर, सराय खालिस, बेरूई और हरनवां में बिजली की आंख-मिचौली आम हो गई है।
धान की रोपाई का मुख्य समय है,लेकिन बिजली नहीं होने से नलकूप नहीं चल रहे हैं डीजल की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, ऐसे में हर किसान जनरेटर का खर्च नहीं उठा सकता। परिणामस्वरूप, धान की रोपाई की गति बेहद धीमी  है,जिससे आगामी फसल पर प्रतिकूल असर की आशंका बढ गई है। उमस भरे मौसम में बिजली संकट ने बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति नाजुक बना दी है। घरों में न तो पंखे चल पा रहे हैं, न ही पानी ठंडा मिल पा रहा है।
 बाजारों में कारोबारी तबका  प्रभावित है। होटल संचालक, वेल्डिंग वर्कशॉप, इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत केंद्र, मोबाइल दुकानदार, जनरेटर ऑपरेटर, आईसक्रीम विक्रेता, फोटो स्टूडियो सभी का बिजली के बिना व्यवसाय कमजोर हो गया है सब्जी विक्रेता व अन्य फुटकर दुकानदार मोमबत्ती और बैटरी लाइट के सहारे दुकानदारी कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारियों को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन फोन नहीं उठते लाइन खराबी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ते है कोई स्थायी समाधान नहीं है। व्यापार मंडल और किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्दी ही विद्युत आपूर्ति को दुरुस्त नहीं किया गया, तो उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे
ग्रामीणों की मांग है कि विद्युत उपकेंद्र की तकनीकी जांच हो,पुराने उपकरण बदले जाएं और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही, फीडरों पर नियमित मॉनिटरिंग कर आपूर्ति बहाल की जाए।
जेई जितेंद्र कुमार जाट का कहना है कि
उपकेंद्र पर लोड अधिक होने और कुछ तकनीकी खामियों की वजह से फीडर बार-बार ट्रिप कर रहा हैं। टीम द्वारा पुराने उपकरणों को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोशिश है कि एक सप्ताह के भीतर आपूर्ति को स्थिर किया जाए।
गेंडुरी के कृषक रवींद्र श्रीवास्तव का कहना है कि खेतों में धान की रोपाई पिछड रही है डीजल बहुत महंगा है यही हाल रहा तो फसलें चौपट हो जाएंगी।स्मिता देवी गृहिणी,सराय खालिस का कहना है कि रात भर बिजली नहीं आती, पंखे नहीं चलते,बच्चों की हालत खराब होती है
व्यापारी नेता बृजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि विद्युत अव्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो सभी ब्यापारी बाजार बंद करके विद्युत उपकेंद्र पर धरना देने के लिए बाध्य होंगे।
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